- कमिटी 3 महीने में देगी अपनी रिपोर्ट
Ranchi : राज्य में हो रहे जमीन सर्वे को लेकर दायर गोकुल चंद की जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राजस्व, पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव की ओर से जवाब दायर किया गया.
राजस्व सचिव की ओर से बताया गया कि लैंड सर्वे की नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर एक कमिटी बनी है. यह कमिटी 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी कि दूसरे राज्यों की नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल झारखंड के लैंड सर्वे में कैसे और कितने समय में कर लिया जाएगा.
प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि लैंड सर्वे की नई टेक्नोलॉजी सीखने के नाम पर पहले ही सरकार काफी समय बिता चुकी है. लैंड सर्वे की टीम ने दूसरे राज्यों के लैंड सर्वे की नई टेक्नोलॉजी का अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट 1 साल पूर्व दे दी थी.
लेकिन अब तक सरकार की ओर से टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर कमिटी बनाने की बात ही कही जा रही है. इससे स्पष्ट है कि सरकार इस मसले पर काफी धीमी गति से काम कर रही है.
इस पर महाधिवक्ता ने कोर्ट से समय की मांग की और कहा कि वह इस मसले पर विभागीय सचिव एवं संबंधित विभागों से बात करेंगे, ताकि झारखंड में लैंड सर्वे का काम नई टेक्नोलॉजी के सहारे तेजी से हो. कोर्ट ने मामले में सरकार का पक्ष सुनने के बाद अगली सुनवाई 5 अगस्त निर्धारित की है.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने पूर्व की सुनवाई में सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर बताने को कहा था कि झारखंड में लैंड सर्वे का काम सभी जिलों में कब तक पूरा होगा.
पूर्व की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि 17 जून 2025 को कोर्ट ने राजस्व, पंजीकरण एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को चार सप्ताह में लैंड सर्वे से संबंधित नई टेक्नोलॉजी का काम पूरा करने को कहा था और इसके 6 माह के भीतर झारखंड के सभी जिलों में लैंड सर्वे का काम पूरा करने को कहा था. लेकिन कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं हुआ है.
उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि झारखंड में लैंड सर्वे के लिए जो टेक्नोलॉजी वर्तमान में है, वह काफी पुरानी है, इसलिए लैंड सर्वे पूरा करने में परेशानी आ रही है. जिस पर कोर्ट ने सरकार से कहा था कि झारखंड में लैंड सर्वे समय से पूरा होने से आम लोगों की जमीन सहित सरकार की जमीन की सुरक्षा संभव होगी.
झारखंड में 1975 से भूमि सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ हुआ था, जो आज 50 साल हो जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है. लैंड सर्वे पूरा करने के लिए कर्मियों की नियुक्ति एवं टेक्नोलॉजी को एडवांस करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए. सरकार ने कोर्ट को बताया था कि दो- तीन जिलों में लैंड सर्वे का काम पूरा हो गया है.
बता दें कि प्रार्थी की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 में भूमि का सर्वे हुआ था. इसके बाद झारखंड में 1980 से भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी. वहीं सरकार ने बताया था कि राज्य में सर्वे का काम चल रहा है. लातेहार व लोहरदगा दो जिले में सर्वे पूरा हो गया है.
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