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रिजिजु बोले, दूसरी व्यवस्था लागू होने तक कॉलेजियम सिस्टम ही काम करता रहेगा, जानें, किसे चेताया…

 
NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति सरकार को करनी होती है. जब तक कोई दूसरी व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक जजों की नियुक्ति के मामले में अभी कॉलेजियम सिस्टम ही काम करता रहेगा. कानून मंत्री रिजिजु इंडिया टुडे कांक्लेव में आज बोल रहे थे. बता दें कि जजों की नियुक्ति के मसले पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच कुछ समय से संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं.

रिटायर जजों के सिर पर विवाद का ठीकरा फोड़ा

कानून मंत्री किरेन रिजिजु ने रिटायर जजों के सिर पर इस विवाद का ठीकरा फोड़ते हुए एक तरह से आरोप लगाया कि वो सरकार और ज्यूडिशरी  के बीच गलतफहमी पैदा कर रहे हैं. कहा कि यह उसी अंदाज में होता है, जिस तरह से विपक्षी दल अक्सर करते हैं. कानून मंत्री ने इन सभी को चेतावनी देते हुए कहा कि ये लोग राष्ट्रविरोधी कारगुजारी का अंजाम जरूर भुगतेंगे. इसे भी पढ़ें : अमित">https://lagatar.in/amit-shah-opened-his-mouth-in-adani-case-said-if-he-has-done-wrong-he-will-not-be-spared/">अमित

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कांग्रेस की सरकारें जजों की नियुक्ति में बेवजह दखल देती थीं

कॉलेजियम सिस्टम पर विचार रखते हुए कानून मंत्री रिजिजु ने कहा कि कांग्रेस की सरकारें जजों की नियुक्ति में बेवजह दखल देती थीं. इसी वजह से कॉलेजियम सिस्टम अस्तित्व में आया था. उनका कहना था कि संविधान के अनुसार जजों की नियुक्ति का काम सरकार का है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और हाईकोर्ट के जजों से सलाह मशविरा करने के बाद सरकार को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति करनी होती है. इसे भी पढ़ें :  खालिस्तान">https://lagatar.in/khalistan-supporter-amritpal-singh-arrested-from-jalandhars-nakodar-internet-service-suspended/">खालिस्तान

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हमने कॉलेजियम के कुछ प्रस्ताव क्यों रोके, सुप्रीम कोर्ट जानता है

कानून मंत्री ने कुछ जजों की नियुक्ति पर मुहर न लगाने के सवाल पर कहा कि वो इस बहस में नहीं पड़ना चाहते. उनका कहना था कि जिन लोगों की जजों के तौर पर नियुक्ति करने के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी नहीं दी उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर था. कॉलेजियम को इस बात का पता है कि सरकार ने इन प्रस्तावों को क्यों रोका. हमें भी पता है कि इन लोगों के नाम क्यों प्रस्तावित किये गये थे.

अमेरिका में जज रोजाना चार से पांच केस ही सुनते हैं

किरेन रिजिजु ने इस क्रम में कहा कि अमेरिका में जज रोजाना चार से पांच केस ही सुनते हैं. जबकि भारत में जज रोजाना 50 से 60 केस सुनते हैं. कई बार तो केसों की तादाद सौ के पार हो जाती है. उनका कहना था कि जिस तरह से जज लगातार काम कर रहे हैं, उन्हें अवकाश की बेहद जरूरत है.

चुनाव आयोग के फैसले पर कहा, जज अपना काम करें तो बेहतर

चुनाव आयोग में होने वाली नियुक्ति के संबंध में आये ताजा फैसले पर रिजिजु ने पूछा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और जज हर नियुक्ति करने लग जाये, तो फिर न्यायपालिका के अपने कामों का क्या होगा. कहा कि जजों के अपने बहुत सारे काम हैं. वे उसे करें [wpse_comments_template]  
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