Ranchi : रिम्स में सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर पद पर नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार के बेटे ऋषभ कुमार का चयन होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं.
बता दें कि 28 मार्च को इन पदों पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हुआ था, जिसके के आधार पर ऋषभ कुमार का चयन हुआ. इस नियुक्ति के तहत ऋषभ कुमार को तीन साल के लिए पदस्थापित किया था और उन्हें प्रतिमाह करीब 1.25 लाख रुपए वेतन मिलना था.
लेकिन नियमों की अनदेखी का आरोप लगने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल इस नियुक्ति को स्थगित कर दिया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं.

विवाद की मुख्य वजह यह है कि नियुक्ति के लिए एनाटॉमी विभाग से एक सीनियर रेजिडेंट की सीट कम कर मास्टर्स इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में ट्रांसफर कर दी गई. बताया जा रहा है कि एमएचए विभाग में पहले से ही सीनियर रेजिडेंट के दो पद भरे हुए थे और अनारक्षित सीट उपलब्ध नहीं थी. इसके बाद एनाटॉमी की सीट घटाकर नई नियुक्ति की गई.
यह भी सामने आया है कि एमएचए को नेशनल मेडिकल कमीशन से मान्यता नहीं है. जबकि एनाटॉमी विभाग पूरी तरह एनएमसी के नियमों के तहत संचालित होता है. ऐसे में सीट ट्रांसफर को लेकर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है.

नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक और बड़ा आरोप यह है कि विज्ञापन में पात्रता की शर्तें ऐसी रखी गईं, जिन्हें ऋषभ कुमार ही पूरा कर रहे थे. उनके बैच के अन्य उम्मीदवार इन शर्तों पर खरे नहीं उतर पा रहे थे, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नियुक्ति पर रोक लगा दी है और जांच के आदेश दिए हैं. यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर नियुक्ति रद्द कर मामले को शासी परिषद के सामने रखा जाएगा. जांच में स्वास्थ्य मंत्री की भी भूमिका रहने की बात कही जा रही है.

वहीं निदेशक डॉ. राजकुमार ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि वे न तो इंटरव्यू पैनल में थे और न ही चयन समिति में शामिल थे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे की शैक्षणिक उपलब्धियां बेहतर हैं और उसके कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं.
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