Ranchi : रिम्स निदेशक राजकुमार ने अपने बेटे ऋषभ कुमार की नियुक्ति को सही करार दिया है. प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा मामले में की गयी नियुक्ति की जांच के दौरान उन्होंने अपना पक्ष पेश करते हुए यह तर्क दिया है.
मार्च 2026 में RIMS निदेशक के बेटे ऋषभ कुमार की नियुक्ति हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में ट्यूटर के पद पर हुई थी. इस नियुक्ति पर RIMS Regulation 2014 में निहित प्रावधानों के तहत आपत्ति की गयी थी.
इसमें यह कहा गया था कि सरकार ने RIMS में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए कोई पद सृजित नहीं की है. लेकिन निदेशक के बेटे की नियुक्ति सरकार द्वारा पद सृजित किये बिना ही कर ली गयी है, जो गलत है.
स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक के बेटे की नियुक्ति पर उभरे विवाद की जांच की जिम्मेवारी प्रमंडलीय आयुक्त को सौंपी थी. प्रमंडलीय आयुक्त ने मामले की जांच के दौरान RIMS निदेशक को अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया था.
इस निर्देश के आलोक में उन्होंने प्रमंडलीय आयुक्त को अपने बेटे की नियुक्ति के सिलसिले में अपना पक्ष पेश किया. राजकुमार ने कहा कि RIMS एक स्वायत्त ईकाई है. राज्य सरकार ने कानून बनाकर इसे स्वतंत्र घोषित किया है.
RIMS में नियुक्ति सहित अन्य मामलों में फैसला लेने का अधिकार शासी परिषद को है. RIMS में हॉस्पिटल मैनेजमेंट का कोर्स नहीं था. इसे बाद में शुरू किया गया. इस पर शासी परिषद की सहमति है. शासी परिषद को RIMS के लिए पद सृजित करने का अधिकार है. इसी कानूनी अधिकार के तहत पद सृजत कर नियुक्ति की गयी है.
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