Rims News : वेतन संकट पर तीसरी बार हंगामा, डायरेक्टर बोले-मेरी तनख्वाह भी रुकी है
By Lagatar News
Jun 01, 2026 03:02 PM
Ranchi : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में वेतन संकट गहराता जा रहा है. सोमवार को डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों सहित लगभग 1500 स्थायी कर्मचारियों ने तीसरी बार डायरेक्टर कार्यालय का घेराव किया.प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि पीजी फर्स्ट ईयर के जूनियर डॉक्टर करीब छह महीने से अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं.
मेरी अपनी तनख्वाह भी रुकी हुई है: डायरेक्टर
रिम्स के डायरेक्टर डॉ. राजकुमार ने स्वीकार किया कि उन्हें दो महीने तक इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है. उन्होंने कर्मचारियों को समझाते हुए कहा कि आपकी तनख्वाह रोकने से उन्हें कुछ नहीं मिलेगा और सच यह है कि उनकी अपनी तनख्वाह भी रुकी हुई है.
जानें क्यों रुकी है सैलेरी
डॉ. राजकुमार ने वेतन में देरी के दो प्रमुख कारण बताए, पहला कारण पुलिस विभाग में हुए एक बड़े घपले के बाद वित्त विभाग द्वारा नियमों में किए गए बदलाव हैं. इन नए नियमों के चलते ट्रेजरी के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में रिम्स कर्मचारियों की सैलरी प्रोसेस नहीं हो पा रही है.
दूसरा कारण टेंपरेरी आईडी की पुरानी व्यवस्था है. साल 2013 से रिम्स में टेंपरेरी आईडी के जरिए वेतन भुगतान होता आया था, जिसमें रिम्स ट्रेजरी से पूरा पैसा लेकर खुद एनपीएस (NPS) कटौती करता था. अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि झारखंड सरकार ने रिम्स के लिए अलग से कोई सॉफ्टवेयर प्रावधान नहीं किया है.
समाधान का आश्वासन, कर्मचारियों की चेतावनी
डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारियों से बातचीत की है और समाधान निकालने के लिए काम करवाया जा रहा है. उन्होंने कर्मचारियों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकारी व्यवस्था में तनख्वाह कभी कम नहीं होती और सभी बकाया राशि का भुगतान जरूर होगा.
साथ ही उन्होंने नाराजगी भी जताई कि प्रदर्शन के कारण पिछले दो दिनों से वेतन बनाने का काम बाधित हो रहा है. प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि अगले दो से चार दिनों में कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा.दूसरी तरफ कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके खातों में वेतन नहीं आया तो वे अपना आंदोलन और अधिक तेज करेंगे.
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