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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजद ने उठाए सवाल, ज्ञानेश कुमार के अधिकारों पर लगे रोक

Ranchi: झारखंड राजद के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा लिए गए कुछ फैसले एक पक्ष विशेष के पक्ष में नजर आते हैं. यादव ने कहा कि विगत वर्षों में बिहार में विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद विवादास्पद ‘SIR’ (Special Intensive Revision) कराया गया. 

 

इस मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधियों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में सैकड़ों याचिकाएं दायर की गई हैं, जो अभी भी लंबित हैं. उन्होंने आगे कहा कि आगामी 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता के खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा के लगभग 193 सांसदों द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाया जाना अभूतपूर्व है और यह आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है.

 

राजद प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल और असम के संदर्भ में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जल्दबाजी में SIR कराए गए और करीब 150 प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला किया गया. जबकि असम में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया. उन्होंने पूछा कि जब ‘SIR’ का उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना है, तो असम में इसे लागू क्यों नहीं किया गया.

 

यादव ने यह भी कहा कि असम चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बार-बार बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाया जाता रहा है, लेकिन चुनाव आयोग इस पर मौन समर्थन देता नजर आता है.

 

अंत में उन्होंने कहा कि राजद का मानना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है, लेकिन वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त के रहते निष्पक्षता पर भरोसा कम हो रहा है. उन्होंने मांग की कि महाभियोग प्रस्ताव पर निर्णय होने तक मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों पर रोक लगाई जानी चाहिए.

 

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