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आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा, 1947 जैसी विभाजनकारी त्रासदी अब इतिहास की बात...

सामाजिक भेदभाव और विभाजन की प्रवृत्ति के संदर्भ में सरसंघचालक मोहन ने कहा कि मंदिर, पानी और श्मशान पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए. कहा कि समाज को बांटने वाली मानसिकता अब बदलनी होगी.
 

  Dehradun :  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि 1947 जैसी विभाजनकारी त्रासदी अब इतिहास की बात हो चुकी है. आश्वस्त किया कि देश में अब कटने और बंटने के दिन जा चुके हैं.   किसी भी परिस्थिति में देश का पुन: बंटवारा नहीं होने दिया जायेगा.

 

श्री भागवत देहरादून में कल सोमवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित संघ यात्रा-नये क्षितिज, नये आयाम विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे.  

 

सामाजिक भेदभाव और विभाजन की प्रवृत्ति के संदर्भ में सरसंघचालक मोहन ने कहा कि मंदिर, पानी और श्मशान पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए. कहा कि समाज को बांटने वाली मानसिकता अब बदलनी होगी.    

 

उन्होंने कहा कि भारत को किसी विदेशी आक्रमणकारी ने अपनी ताकत से नहीं जीता, बल्कि समाज में फूट के कारण विदेशी ताकतों को यहां शासन का अवसर दिया.

 

गोष्ठी में सरसंघचालक ने जनसंख्या असंतुलन और डेमोग्राफी चेंज पर चिंता व्यक्त करते हुए तीन बच्चे होने  का समर्थन किया. उन्होंने कहा, जनसंख्या कानून अब आवश्यकता बन गया है.

 

 

आरएसएस चीफ ने उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गयी समान नागरिक संहिता (UCC) की तारीफ की. साथ ही इसे पूरे देश मेंलागू करने की बात कही. 
 


आरक्षण पर सहमति जताते हुए मोहन भागवत ने माना कि आरक्षण समाज में बराबरी लाने का सशक्त माध्यम है. कहा कि जब तक समाज के मन में भेदभाव और छुआछूत बनी रहेगी, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए.  
 


महिला सशक्तिकरण को लेकर कहा कि महिलाओं को समाज की आधी शक्ति माना जाना चाहिए. उन्हें  33 नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए

 

मोहन भागवत ने समाज में बढ़ रहे लिव-इन रिलेशन पर कहा कि यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं. कहा कि बिना विवाह के केवल उपभोग की प्रवृत्ति पशुओं जैसी है. युवाओं को चाहिए कि उन्हें विवाह की सामाजिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए.


  

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