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23 माह के बकाया मानदेय के बीच RU की गेस्ट फैकल्टी की मौत, मानव अधिकार संगठन ने जांच की मांग की

Ranchi : संगठन का दावा है कि मुन्नी कुमारी का करीब 23 महीने का मानदेय बकाया था. उस दौरान वह इलाज के लिए हैदराबाद में थीं. संगठन के अनुसार, आर्थिक परेशानी के बीच इलाज का खर्च उठाना भी उनके लिए मुश्किल था.
 
मानव अधिकार संगठन

Ranchi : मारवाड़ी कॉलेज के हिंदी विभाग में गेस्ट फैकल्टी रही मुन्नी कुमारी की इलाज के दौरान मौत मामले में मानव अधिकार संगठन ने जांच की मांग की है. संगठन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव विनय चंद्र ने मामले को लेकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष कार्रवाई की मांग की है.

 

संगठन का दावा है कि मुन्नी कुमारी का करीब 23 महीने का मानदेय बकाया था. उस दौरान वह इलाज के लिए हैदराबाद में थीं. संगठन के अनुसार, आर्थिक परेशानी के बीच इलाज का खर्च उठाना भी उनके लिए मुश्किल था.

 

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मानदेय में देरी की जांच की मांग

मानव अधिकार संगठन ने कहा है कि मामले की पूरी जांच होनी चाहिए. इसमें यह देखा जाए कि मानदेय के भुगतान में देरी क्यों हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था. संगठन ने कहा है कि अगर जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या किसी दंडनीय कृत्य की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए.

 

तीन गेस्ट फैकल्टी की मौत का दावा

NHRCCB के अनुसार, अब तक तीन अतिथि शिक्षकों की मौत लंबित मानदेय के बीच हो चुकी है. संगठन ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने 7 अगस्त 2026 को जरूरी राशि हाईकोर्ट में जमा कर दी थी, लेकिन संबंधित शिक्षकों को भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. शुरुआत में 124 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. संगठन के अनुसार, फिलहाल 96 शिक्षक जीवित हैं और उनके सामने भी आर्थिक परेशानी बनी हुई है.

 

परिजनों को बकाया राशि देने की मांग

मानव अधिकार संगठन ने मुन्नी कुमारी के 23 महीने के बकाया मानदेय और अन्य वैध राशि उनके परिजनों को जल्द देने की मांग की है. साथ ही बाकी अतिथि शिक्षकों के लंबित मानदेय का भी तत्काल भुगतान करने को कहा है.

 

विनय चंद्र ने कहा कि मानदेय भुगतान में हुई देरी की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और प्रभावित परिवार को उसका वैध अधिकार दिलाया जाए.

 

संगठन के अनुसार, यह सिर्फ एक शिक्षिका की मौत का नहीं, बल्कि राज्य के अतिथि शिक्षकों के आर्थिक संकट और उनके अधिकारों से भी जुड़ा मामला है.

 

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