Ranchi: साहब दूसरों पर नियम कानून का डंडा चलाते हैं. लेकिन अपनों के लिए नियम कानून ताक पर रख देते हैं. अपनों को कुर्सी दिलाने के लिए साहब का हथकंडा इन दिनों सचिवालय में चर्चा का विषय बना हुआ है. चर्चा है कि भोजन भात से जुड़े विभाग में सरकार ने एक महिला अफसर को तैनात करने का आदेश दिया था. अधिसूचना जारी हो चुकी थी. लेकिन साहब के करीबी रिश्तेदार चूक गये थे. चूक की कहानी रिश्तेदार की जुबानी साहब तक पहुंची. इसके बाद साहब हरकत में आये. पहले मुंडा दिशुम जिले की उस कुर्सी को खाली रखने का जुगाड़ किया, जिसपर महिला अफसर को तैनात करने का आदेश जारी किया गया था.
इसलिए सबसे पहले महिला अफसर को साहब का सलाम भेजवाया गया. ब्यूरोक्रेसी में अफसरों के बीच सलाम भेजने की परंपरा है. सलाम भेजने की परंपरा को नियम कानून से अलग हटकर मदद करने या मदद मांगने का संकेत समझा जाता है. साहब का सलाम मिलते ही महिला अफसर के कान खड़े हो गये. कुछ ही पल में नया संदेश दिया गया कि महिला अफसर अपनी नयी कुर्सी पर नहीं बैठें. इससे वह जगह खाली ही रही.
इसके बाद साहब ने अपने रिश्तेदार को वह कुर्सी दिलाने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल किया. कुछ ही दिनों में साहब को कामयाबी मिली. करीबी रिश्तेदार को मुंडा दिशुम की जबरन खाली रखी गयी कुर्सी देने का आदेश जारी हुआ. साहब के करीबी रिश्तेदार को मनपसंद कुर्सी मिल गयी. महिला अफसर को भी दूसरी कुर्सी दी गयी. लेकिन वह उन्हें पसंद नहीं है. इसलिए महिला अफसर भी मनपसंद कुर्सी की आस लगाये बैठी हैं.
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