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सदर अस्पताल बाउंड्री वॉल विवाद गहराया: आमने-सामने स्वास्थ्यकर्मी व अधिवक्ता, असमंजस में प्रशासन

Dhanbad : धनबाद सदर अस्पताल की बाउंड्री वॉल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब टकराव का रूप ले चुका है. सुरक्षा और आवागमन के अधिकार के बीच छिड़ी इस जंग में स्वास्थ्यकर्मी और अधिवक्ता आमने-सामने आ गए हैं. 

 

शनिवार को अस्पताल परिसर उस समय विरोध का केंद्र बन गया, जब जिले भर से आए चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन किया. जिसमें अधिवक्ताओं को रास्ता देने की सहमति जताई गई थी.

 

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला, सुरक्षा से समझौता नहीं

विरोध प्रदर्शन कर रहे झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन, ऑल झारखंड मेडिकल एसोसिएशन, झांसा और आईएमए (IMA) सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कोई व्यक्तिगत या स्थानीय विवाद नहीं बल्कि अस्पताल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है.

 

स्वास्थ्यकर्मियों ने कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है. कोर्ट ने साफ कहा था कि यदि अस्पताल प्रशासन सुरक्षा देने में असफल रहता है तो उसे संचालन का नैतिक अधिकार नहीं है.

 

कर्मियों का आरोप है कि अस्पताल परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही बाउंड्री वॉल का निर्माण किया गया है. अधिवक्ताओं को पहले ही छह फीट जमीन आवंटित की जा चुकी है, इसके बावजूद अस्पताल की दीवार तोड़कर रास्ता मांगना नियमों और सुरक्षा मानकों के विरुद्ध है. उनका साफ कहना है कि किसी भी हाल में बाउंड्री वॉल नहीं तोड़ने दी जाएगी. 

 

स्वास्थ्यकर्मियों ने अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया. अस्पताल परिसर से रणधीर वर्मा चौक तक मौन जुलूस निकाला गया. बड़ी संख्या में कर्मचारी इसमें शामिल हुए. हालांकि मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए इमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं किया गया. केवल रूटीन कार्य से जुड़े कर्मचारी ही विरोध में शामिल रहे, जिससे इलाज व्यवस्था प्रभावित न हो.

 

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अधिवक्ताओं की मांग: पारंपरिक रास्ता बहाल हो

दूसरी ओर धनबाद बार एसोसिएशन भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. अधिवक्ताओं का कहना है कि बाउंड्री वॉल बनने से उनका वर्षों पुराना आवागमन मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतें हो रही हैं. उनका तर्क है कि रास्ता देना उनका अधिकार है और प्रशासन को इसका समाधान निकालना चाहिए. बार एसोसिएशन का धरना प्रदर्शन भी लगातार जारी है.

 

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एसएसपी का आश्वासन, फिर भी नहीं बनी बात

शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार के साथ हुई वार्ता में अस्थायी रास्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद हड़ताल खत्म होने की उम्मीद जगी थी. हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों के तीखे विरोध के बाद यह समाधान फिलहाल अधर में लटक गया है.

 

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती


वर्तमान में सदर अस्पताल परिसर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है. एक तरफ कानून के रखवाले अधिवक्ता हैं तो दूसरी ओर जीवन रक्षक स्वास्थ्यकर्मी. दोनों ही अपने-अपने तर्कों के साथ डटे हुए हैं. 

 

अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना आवागमन की समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए. अगर जल्द सहमति नहीं बनी तो यह विवाद और गहरा सकता है, जिससे अस्पताल की व्यवस्था और आमजन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. फिलहाल सबकी नजर प्रशासनिक पहल और संभावित समझौते पर टिकी है.

 

 

 

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