Saurav Singh Ranchi : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद साहिबगंज जिला प्रशासन सजग हुआ है. जिला प्रशासन ने झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम की धारा 12 (1) और (2) के तहत अपराधी दाहू यादव समेत लोगों के खिलाफ सीसीए लगाने की सिफारिश की है. जिन लोगों के खिलाफ सीसीए लगाने की सिफारिश की है, उनमें दाहू यादव, उनके भाई सुनील यादव, पत्थर खनन व्यवसायी प्रकाश चंद्र यादव और अशोक यादव शामिल हैं.
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन लोगों को जेल में ही रखा जाना चाहिए
साहिबगंज जिला प्रशासन ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन लोगों को जेल में ही रखा जाना चाहिए. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के गृह विभाग को भेजे पत्र में जिला प्रशासन ने दाहू यादव, उनके भाई सुनील यादव, पत्थर खनन व्यवसायी प्रकाश चंद्र यादव और अशोक यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. सीसीए के अनुसार, डीसी किसी व्यक्ति को 12 दिनों के लिए जेल में रखने का हकदार है, यदि उसके लिए संतोषजनक आधार है. मुख्य सचिव की सिफारिश पर किसी व्यक्ति को तीन महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जा सकता है. हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के एक साल के लिए जेल में रखा जाना है, तो यह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की एक समिति द्वारा तय की जाती है.
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कानून व्यवस्था की समस्या पैदा करेगी
सभी के खिलाफ सीसीए लगाने के प्रस्ताव के पीछे का कारण बताते हुए जिला प्रशासन ने कहा कि उनकी उपस्थिति गंभीर कानून व्यवस्था की समस्या पैदा करेगी. इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा जाना चाहिए. दाहू यादव पंकज मिश्रा का एक प्रमुख सहयोगी और मनी लॉन्ड्रिंग में एक प्रमुख संदिग्ध है. उससे पूछताछ के लिए ईडी ने कई बार समन भेजा, लेकिन दाहू यादव ईडी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है. दाहू यादव के ऊपर एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. ईडी ने उसके भाई सुनील यादव को भी समन जारी किया है.
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प्रकाश चंद्र यादव का नाम सामने आया
ईडी द्वारा अवैध पत्थर खनन मामले की जांच शुरू करने के बाद प्रकाश चंद्र यादव का नाम सामने आया. ईडी ने उन्हें कुछ तथ्यों और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए तलब किया था. हालांकि उनके बेटे अंकुश चंद्र यादव का बयान दर्ज किया गया है. ये तथ्य और दस्तावेज पंकज मिश्रा, साहिबगंज डीएमओ विभूति कुमार, दाहू यादव और रेलवे के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ उनके पत्थरों को अवैध रूप से उठाने और उन्हें बिना चालान के रेलवे के माध्यम से ले जाने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित हैं. बीते 30 जुलाई को रांची में साहिबगंज पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, जब वह एक राजनेता से मिलने के बाद पटना लौट रहे थे. दूसरी ओर अशोक यादव अवैध खनन मामले में ईडी के गवाह हैं. इसे भी पढ़ें - बीजेपी">https://lagatar.in/bjps-pc-state-president-nitish-betrayed-the-people-and-mandate-of-bihar/">बीजेपी
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