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सहिया को तकनीकी रूप से सशक्त करेंगे, एक माह में 42 हजार टैब वितरण: इरफान अंसारी

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर शनिवार को चाणक्य BNR, रांची में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की
 

Ranchi: राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर शनिवार को चाणक्य BNR, रांची में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की. इस मौके पर मातृ और शिशु स्वास्थ्य को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं को विस्तार से रखा गया.

 

डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि किसी भी महिला को बच्चे को जन्म देते समय अपनी जान नहीं गंवानी चाहिए. उन्होंने मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाने का संकल्प दोहराया और कहा कि यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि झारखंड को स्वास्थ्य सेवाओं में देश में तीसरे स्थान से पहले स्थान तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है.

 

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कार्यक्रम में मंत्री ने डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की 42 हजार सहिया कार्यकर्ताओं को एक महीने के भीतर टैब दिए जाएंगे. इससे गांव स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर होंगी और निगरानी भी आसान होगी.

 

किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि 18 वर्ष के बाद विवाह सुनिश्चित करने और एनीमिया नियंत्रण पर काम किया जा रहा है. उन्होंने सहिया कार्यकर्ताओं और नर्सों की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी 24 घंटे सेवा देकर संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही हैं.

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और एनीमिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा. यूनिसेफ के सहयोग से जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर भी काम किया जा रहा है. गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए ममता वाहन जैसी सेवाएं भी प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं.

 

अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि किसी भी राज्य का वास्तविक विकास मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर जैसे स्वास्थ्य सूचकों से मापा जाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड ने इस दिशा में सुधार किया है, लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है.

 

तकनीकी सत्र में मातृ स्वास्थ्य की स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. पुष्पा ने बताया कि उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. लक्ष्य मातृ मृत्यु दर को सिंगल डिजिट तक लाना है.

 

यूनिसेफ की प्रतिनिधि पारुल शर्मा ने झारखंड के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उभरता मॉडल बन रहा है. उन्होंने कहा कि मातृत्व एक नई जिंदगी की शुरुआत है और एक भी मातृ मृत्यु स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए.

 

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनमें केडिया बंधु और पंडित मिथिलेश झा की प्रस्तुति ने आयोजन को और खास बना दिया. इस अवसर पर उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान और प्रसवपूर्व देखभाल से जुड़ा एक मॉड्यूल भी लॉन्च किया गया.कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना था.

 

 


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