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ओम बिरला के तेवर वही, कहा, पीएम को भी बोलने के लिए अनुमति लेनी होती है, कोई नियमों से ऊपर नहीं

  • नियम मैंने नहीं बनाये हैं. नियम मुझे विरासत में मिले हैं
  • माइक का बटन स्पीकर के पास नहीं होता
  • जिसे बोलने की अनुमति मिलेगी, उसका माइक ऑन होगा
  • विपक्षी सदस्यों ने कहा, सरकार नहीं चाहती कि सदन चले

New Delhi : लोकसभा स्पीकर  ओम बिरला  के खिलाफ कल बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद आज गुरुवार को जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई. तो विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया. आज आसन पर ओम बिरला नजर आये.

 

ओम बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने की अपील करते हुए कहा कि इसे महत्वपूर्ण करार दिया. पूछा कि क्या आप प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते. हंगामे के बीच विपक्षी सदस्यों ने कहा कि वे तो चाहते हैं कि सदन चले लेकिन सरकार नहीं चाहती.ओम बिरला ने इसके बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

 

 

12 बजे के बाद जब फिर सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो ओम बिरला  ने अपनी बात रखी. कहा कि लोकतांत्रिक  भारत के इतिहास में तीसरी बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के प्रस्ताव आया. उस पर 12 घंटे चर्चा की गयी. ताकि सभी सदस्य अपने विचार अपनी चिंताएं तर्क के साथ सदन के समक्ष रख सकें.

 

ओम बिरला ने कहा कि प्रतिपक्ष के सासंदो ने विपक्ष की आवाज दबाने की बात कहते हुए सदन की  परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं पर बात रखी. स्पीकर बिरला ने  विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा पोस्टर लेकर आने और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है.

 

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा व्यवधान डालने और पीएम की कुर्सी के पास जाने की कोशिश पर उन्होंने चिंता जताई. कहा कि जिस तरह से विपक्ष की महिला सांसद वेल में आयी और प्रधानमंत्री की चेयर का घेराव किया. वह अप्रत्याशित था. कुछ भी सकता था.  इसीलिए मैंने नेता सदन (पीएम मोदी )से सदन में न आने का आग्रह किया.

 

यह सदन नियमों से चलता है. सदन की मर्यादा बनाये रखने का प्रयास हम सभी को करना चाहिए.ओम बिरला ने माइक बंद करने के आरोप पर कहा कि माइक का बटन स्पीकर के पास नहीं होता. कहा कि जिसे बोलने की अनुमति मिलेगी, उसका माइक ऑन होगा.

 

यह आरोप कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है, पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता है, ओम बिरला ने कहा कि नेता सदन हों, विपक्ष के नेता हों या मंत्री, सभी को नियमों के तहत ही बोलना होता है. कहा कि पीएम को भी बोलने के लिए अनुमति, लेनी होती है कोई नियमों से ऊपर नहीं है.

 

विपक्ष के नेता किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, इस पर श्री बिरला ने स्पष्ट किया कि सदन नियमों से चलता है और यह नियम मैंने नहीं बनाये हैं. नियम मुझे विरासत में मिले हैं. सदन किसी एक व्यक्ति का नहीं है, सभी का है.सभी के लिए नियम एक समान हैं.

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या मंत्री को भी वक्तव्य देना होता है, तो वे भी पहले नोटिस देते हैं. कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है. ओम बिरला  ने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करता हैं.

 

मेरा प्रयास रहा कि  सदन समाज के हर व्यक्ति की आवाज बने. सदन की कार्यवाही में सभी को हिस्सा  मिले. यह भी बताया कि उन्होंने मैंने चैंबर में बुलाकर आप सबसे अपने क्षेत्र की आवाज सदन में रखने का आग्रह किया.. लोकसभा स्पीकर  ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति-असहमति की महान परंपरा हमेशा रही है.  

 


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