Saraikela/ Gamharia: कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 15वीं बैठक का अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया. इस मौके पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के आरवीसी के डीन सह वैज्ञानिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. एमके गुप्ता ने कहा कि उन्नत तकनीकी से ही कृषि का विकास संभव है. सृष्टि में भौगोलिक परिवर्तन से प्रकृति पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है. इसका प्रभाव भी सीधे तौर पर कृषि पर पड़ने से किसानों की समस्या बढ़ती जा रही है.
कृषि वैज्ञानिकों को जिले की भौगोलिक स्थिति का आकलन कर कृषि तकनीकी का इजाद करना होगा. किसानों को भी अब अत्याधुनिक तकनीकी अपना कर खेती की पद्धति को बदलना होगा. इसके लिए सरायकेला कृषि विज्ञान विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को नई तकनीकी का प्रशिक्षण देने की सख्त जरूरत है. कृषि से जुड़े प्रगतिशील महिला एवं पुरुष किसानों को उनके रुचि के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था करना होगा.
उन्होंने कहा कि किसानों को आय दोगुनी करने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम अपनाना होगा. किसानों के लिए यह काफी लाभदायक सिद्ध हो रहा है. इस प्रणाली को अपनाकर छोटे एवं सीमांत किसान अधिक उपज वाली फसलों के साथ मशरूम, सब्जियां, फल, दूध, अंडे, पशुपालन समेत अन्य लाभदायक उत्पाद पैदा कर बेहतर आय का उपार्जन कर सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र किसानों का नॉलेज टैंक
कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 15वीं बैठक में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अपर निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. निरंजन लाल ने कहा कि किसानों के विकास से ही देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सकती है. किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र नॉलेज टैंक है. इसके माध्यम से किसान खेती की नई तकनीकी से लेकर पशुपालन एवं आय उत्पादन के सभी श्रोतों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक किसानों के दरवाजे पर दस्तक देकर महिला एवं पुरुष किसानों को नई तकनीकी का प्रशिक्षण दें.
लाह की खेती में किसानों का झुकाव
बैठक में केवीके प्रमुख सह वरीय वैज्ञानिक पंकज सेठ ने 2025-26 का कार्य योजना प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि जिले को कृषि क्षेत्र में अव्वल बनाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण के साथ उन्नत बीज एवं अन्य सामग्रियों की जानकारी दी जा रही है. बताया कि लाह की खेती पर किसानों का काफी झुकाव है. जबकि धान के अलावा तेलहन एवं दलहन की खेती भी किसान कर रहे हैं.
ये हुए शामिल
इस अवसर पर नाबार्ड की डीडीएम चन्दना सुमन, आत्मा निदेशक विजय कुमार सिंह, जिला सहकारिता पदाधिकारी जगमनी टोपनो, डॉ देवाशीष महतो, डा.एसएस मुंडा, विश्वजीत कुमार, शिल्पी अनुपमा सिंह, नीरज नयन, डीके रजक, सोखेन हेंब्रम, मुखिया सुकमति मार्डी, जिला मत्स्य पदाधिकारी राज कुमार तुरी, पंसारी हेंब्रम, कल्याण कुमार, सुमराय टुडू, गोदरा मार्डी समेत काफी संख्या में कृषि वैज्ञानिक एवं जिले भर के प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे.
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