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सरला बिरला विवि का तृतीय दीक्षांत समारोह संपन्न, 1331 को मिली उपाधि

सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची का तृतीय दीक्षांत समारोह आज विश्वविद्यालय परिसर में भव्य रूप से आयोजित किया गया. झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
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Ranchi : सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची का तृतीय दीक्षांत समारोह आज विश्वविद्यालय परिसर में भव्य रूप से आयोजित किया गया. झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की गवर्निंग बोर्ड के सदस्य, विशिष्ट अतिथि तथा बड़ी संख्या में अभिभावक और छात्र मौजूद थे.

 

समारोह की शुरुआत राज्यपाल संतोष गंगवार एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई. इसके पश्चात विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया गया. अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो देकर किया गया.

 

कुलपति का स्वागत भाषण

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी. जगन्नाथन ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में स्थापित विश्वविद्यालय ने 2018 में मात्र 67 विद्यार्थियों के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा प्रारंभ की थी. आज यह संस्थान 11 संकायों के अंतर्गत 69 पाठ्यक्रमों में 5,500 से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है.

 

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने यूसी बर्कले और इसरो जैसी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ शैक्षणिक सहयोग स्थापित किया है, जिससे शोध और करियर के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं.

 

उन्होंने छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है तथा नर्सिंग के छात्र जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय नियुक्ति प्राप्त कर रहे हैं.

 

कुलपति ने आधुनिक अधोसंरचना, नवाचार और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्चुअल लैब उपयोग में विश्वविद्यालय को शीर्ष स्थान प्राप्त है तथा पर्यावरणीय मानकों में भी उच्च रेटिंग मिली है.

 

राज्यपाल का संबोधन

मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होना चाहिए. उन्होंने युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने और नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया.

 

उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए युवाओं से अनुशासन, दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने की अपील की.

 

विशिष्ट अतिथियों के उद्बोधन

पद्मश्री पूर्णिमा महतो ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री प्राप्त करना अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है. उन्होंने अनुशासन, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने की प्रेरणा दी.

 

डॉ. बिनॉय कुमार दास (डीआरडीओ) ने भारत के रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की चर्चा करते हुए कहा कि देश की सेवा में योगदान देना ही सच्ची सफलता है. उन्होंने युवाओं से राष्ट्र की सुरक्षा और वैश्विक शांति में योगदान देने का आह्वान किया.

 

इसरो के प्रतिनिधि गौरी शंकर ने डॉ. वी. नारायणन की ओर से मानद उपाधि ग्रहण करते हुए कहा कि यह सम्मान देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने युवाओं से नई जिम्मेदारियों को स्वीकार कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अपील की.

 

अनंत जाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक वैश्विक ज्ञान के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय ही सच्ची शिक्षा है. वहीं गोविंदभाई लालजीभाई ढोलकिया ने कहा कि विश्वविद्यालय की डिग्री पेशेवर जीवन की शुरुआत मात्र है और सफलता के लिए कठोर परिश्रम आवश्यक है.

 

1331 विद्यार्थियों को उपाधि

दीक्षांत समारोह में कुल 1,331 विद्यार्थियों को डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं. इनमें 10 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं. उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जबकि 95 विद्यार्थियों को डिप्लोमा प्रदान किया गया.

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