Ranchi : CUJ परिसर में ट्राइबल स्टूडेंट्स कल्चरल एसोसिएशन (TSCA-CUJ) के तत्वावधान में सरहुल पूर्व संध्या महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और प्रकृति के प्रति गहरी आस्था का मनोहारी प्रदर्शन देखने को मिला.कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सारंग मेढेकर एवं रजिस्ट्रार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया.
अपने संबोधन में कुलपति ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.
महोत्सव के दौरान 12 परहा, टंगरबांसली, नगरा, मनातू और TSCA-CUJ की खोड़हा टीम द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए. इन प्रस्तुतियों में सरहुल पर्व की झलक, प्रकृति पूजा, सामुदायिक एकता और आदिवासी जीवनशैली की अनूठी छवि उभरकर सामने आई, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया.
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित करना तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना रहा. बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की उपस्थिति से पूरा विश्वविद्यालय परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया. TSCA-CUJ के सदस्यों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, समरसता और पारंपरिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होते हैं.
इस अवसर पर डॉ. रमेश उरांव, डॉ. बी. बी. मिश्रा, डॉ. सुचिता सेन चौधरी, डॉ. सुचित पटेल, डॉ. प्रशांत मोदी, डॉ. कंचन लकड़ा सहित कई प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम को सफल बनाने में विवेकानंद उरांव, बिट्टू कुमार लोहरा, नयारा चला भगत, सुषमा उरांव, निकिता पाहन, आलोक तिग्गा, आदित्य मेहरा, राहुल लोहरा, फ्रांसिस खलखो, अनिम खलखो और कविता मुंडा का विशेष योगदान रहा.
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