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Gumla News: गुमला में खेत बचाओ अभियान शुरू, 155 किसानों को किया गया जागरूक

Gumla News: किसानों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी देते हुए बताया गया कि असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग, फसल अवशेषों को जलाना, मृदा अपरदन तथा जैविक पदार्थों की कमी से खेतों की उर्वरता प्रभावित होती है.
 
किसानों को टिकाऊ खेती का मिला गुरुमंत्र

Gumla News: किसानों की आजीविका सुरक्षित करने, कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से गुरुवार को टोटो में खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ किया गया. इस अभियान के तहत 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक किसानों को टिकाऊ एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाएगा. 

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कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी देते हुए बताया गया कि असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग, फसल अवशेषों को जलाना, मृदा अपरदन तथा जैविक पदार्थों की कमी से खेतों की उर्वरता प्रभावित होती है. इससे कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद उपाध्यक्ष, गुमला  उपस्थित रहे. इस दौरान 155 किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. बृजेश पाण्डेय, प्रखंड विकास पदाधिकारी, गुमला, डीवाईपीडी, आत्मा, जिला कृषि पदाधिकारी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.

 

डॉ. बृजेश पाण्डेय ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, जैविक एवं हरी खाद का उपयोग, फसल चक्र अपनाने तथा खेतों में नमी संरक्षण जैसे वैज्ञानिक उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी देने एवं कृषि संबंधी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने की भूमिका पर भी प्रकाश डाला.

 

अभियान के तहत मृदा एवं जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन, जैव विविधता को बढ़ावा देने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसलों की खेती के प्रति किसानों को जागरूक किया जाएगा. इन उपायों से कृषि भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादन लागत कम करने तथा खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने में सहायता मिलेगी. 

 

अधिकारियों ने कहा कि कृषि भूमि का संरक्षण वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है. इसके लिए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना जरूरी है.खेत बचाओ अभियान के माध्यम से जिले में मृदा संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति किसानों की भागीदारी बढ़ाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल की जा रही है.

 

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