Ranchi : सुप्रीम कोर्ट ने 82 वर्षीय वृद्ध नरेश मलहोत्रा से 22.93 करोड़ की साइबर ठगी मामले में केंद्र सरकार, रिजर्व बैक ऑफ इंडिया (RBI), CBI और संबंधित बैंकों को नोटिस जारी किया है. पीड़ित नरेश मलहोत्रा ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी को नोटिस जारी किया है. अब इस मामले में अगली सुनवाई मार्च में होने की संभावना है.
याचिका में नरेश मलहोत्रा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि ठगी की गई 22.93 करोड़ रुपये की राशि को एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में जमा कराने का निर्देश दिया जाए. साथ ही डिजिटल अरेस्ट के जरिए की जा रही साइबर ठगी से नागरिकों को बचाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की मांग की गई है.
इसके अलावा याचिका में साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों की पहचान कर उनके खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके द्वारा थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी की जांच सीबीआई से कराने का भी अनुरोध किया गया है.
नरेश मलहोत्रा ने अपनी याचिका में कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक, यस बैंक और एक्सिस बैंक को प्रतिवादी बनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी बैंकों को नोटिस जारी किया है.
क्या है पूरा मामला
याचिका के अनुसार, अगस्त 2025 में अस्पताल से लौटने के बाद नरेश मलहोत्रा को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया. यह मामला किसी एक व्यक्ति से की गई अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी माना जा रहा है.
1 अगस्त 2025 को साइबर अपराधियों ने फोन कर बताया कि उनके आधार नंबर का इस्तेमाल कर कई बैंकों में खाते खोले गए हैं और इन खातों के जरिए 1300 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई है. आरोपियों ने दावा किया कि इस रकम का इस्तेमाल टेरर फंडिंग और पुलवामा हमले में किया गया है.
साइबर अपराधियों ने खुद को एनआईए (NIA) का अधिकारी बताते हुए जांच जारी होने की बात कही और उनके परिवार, निवेश और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी हासिल की. इसके बाद व्हाट्सएप पर एनआईए कोर्ट का एक फर्जी आदेश भेजा गया, जिसमें उन्हें गिरफ्तार बताया गया.
कई दिनों तक उनसे हर दो घंटे पर हाजिरी ली जाती रही. बाद में यह कहकर फोन किया गया कि उम्र और बीमारी को देखते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग की शर्त पर बेल ऑर्डर दिया है. अपराधियों ने हाईकोर्ट का फर्जी आदेश भेजा और
अपराधियों ने नरेश मलहोत्रा के खाते से 14 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए और बदले में आरबीआई की एक फर्जी रसीद भेजी गई. इसके बाद उन्होंने 14 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिसकी राशि अलग-अलग बैंकों के खातों में ट्रांसफर करवाई गई. इसके बाद 10 करोड़ रुपये के शेयर और बेचे गए. यह सिलसिला करीब एक महीने तक चलता रहा.
इसके बाद पीड़ित को फोन कर बताया गया कि पहले जांच कर रही एजेंसी के अधिकारियों ने अभियुक्तों से समझौता कर लिया है और अब जांच ईडी (ED) को सौंप दी गई है. इसके बाद पीड़ित को उनका पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई. लेकिन इसके लिए पांच करोड़ रुपये की गारंटी मांगी गई.
अपराधियों ने पैसों की व्यवस्था करने के बाद कोलकाता की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खाते में राशि जमा कराने को कहा. इस पर नरेश मलहोत्रा ने आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास राशि जमा कराने पर अड़ गए.
इसके बाद अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी आदेश भेजा. जब नरेश मलहोत्रा ने प्राइवेट कंपनी में पैसा जमा करने से इनकार किया, तो साइबर अपराधियों ने संपर्क तोड़ दिया. इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई.
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