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जूनियर इंजीनियर परीक्षा पेपर लीक में SC ने आउटसोर्सिंग कंपनी को किया नोटिस

Ranchi: साल 2022 में  जूनियर इंजीनियर परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी आउटसोर्सिंग कंपनी को जेएसएससी ने ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश दिया था. जेएसएससी के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज किया था. जिसे जेएसएससी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
 

Ranchi: साल 2022 में  जूनियर इंजीनियर परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी आउटसोर्सिंग कंपनी को जेएसएससी ने ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश दिया था. जेएसएससी के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज किया था. जिसे जेएसएससी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में हाईकोर्ट में आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका की कार्यवाही पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी. 


साथ ही आरोपी आउटसोर्सिंग कंपनी को नोटिस जारी किया है. मामले में सुप्रीम कोर्ट में जेएसएससी की ओर से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा.जेएसएससी की ओर से बताया गया कि आउटसोर्सिंग कंपनी ने मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की है.

 

दरअसल  मामले में हाईकोर्ट ने 26 जून 2025 को झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक करने के मामले में आरोपी एजेंसी मेसर्स बिनसीस टेक्नोलॉजी को ब्लैक लिस्ट करने के जेएसएससी के आदेश को खारिज कर दिया था. साथ ही जेएसएससी पर दो लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया था. 

 
उल्लेखनीय है कि 26 जून 2025 के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था, सिर्फ पुलिस रिपोर्ट के आधार पर किसी कंपनी को आजीवन ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा सकता. कंपनी की ओर से दिए गए बिल का सात फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश आयोग को हाईकोर्ट ने दिया था.   कोर्ट ने कहा था कि यदि कंपनी की सिक्योरिटी मनी जब्त की गयी है, तो आयोग उसे वापस करे. 

 


आउटसोर्सिंग कंपनी ने JSSC के आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती


बता दें कि विनसीस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका देकर जेएसएससी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आयोग ने पेपर लीक मामले में उसे डिबार करते हुए काली सूची में डाल दिया था. 


आयोग ने अदालत को बताया था कि पुलिस रिपोर्ट में स्पष्ट था कि परीक्षा एजेंसी की संलिप्तता है. इसलिए यह कार्रवाई की गई. अदालत को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया था कि वर्ष 2024 में पुलिस ने फिर से एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें आरोप सही होने की बात कही गई थी. 


आयोग बिल का भुगतान भी नहीं कर रहा है. इस पर आयोग ने कहा कि एजेंसी ने जो परीक्षा ली, उसे आयोग को रद्द करना पड़ा है. इस कारण बिल का भुगतान नहीं किया जा सकता. आयोग की ओर से अदालत को बताया गया था कि यह परीक्षा 3 जुलाई 2022 को ली गयी थी. पेपर लीक होने और पुलिस जांच के बाद 25 जुलाई 2022 को परीक्षा रद्द कर दी गयी थी.

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