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पवन खेड़ा की याचिका सुनने से SC का इनकार, फर्जी आधार कार्ड पर फटकारा, असम जाने को कहा

New Delhi : कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से फिर झटका लगा है.  SC ने पवन खेड़ा को सुरक्षा देने से इनकार  करते हुए उन्हें गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए असम की अदालत में जाने को कहा.

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ उन्होंने आरोप लगाये थे और  उनके खिलाफ दर्ज मामले में 20 अप्रैल तक संभावित दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की गयी थी.

 

पवन खेड़ा की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखी. SG तुषार मेहता ने खेड़ा की याचिका का विरोध किया. दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल की अवधि मंगलवार, 21 अप्रैल तक बढाने से इनकार कर दिया.

 

सुनवाई के क्रम में तेलंगाना हाईकोर्ट में फर्जी आधार कार्ड पेश करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई. कोर्ट ने  पूछा कि जब पते को लेकर स्पष्टता नहीं है तो तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका क्यों दाखिल की.

 

इसका जवाब देते हुए खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क रखा कि  जिस दस्तावेज पर सवाल उठाये जा रहे हैं, उसे तेलंगाना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सुधार दिया गया था.जज को जानकारी दे दी गयी थी.  

 

सिंघवी ने कहा जल्दबाजी में गलती हुई थी. किसी आपराधिक मंशा से यह नहीं किया गया.   सिंघवी ने कहा कि वह सोमवार तक गुवाहटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर देंगे.

 

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि तब तक उन्हें अंतरिम राहत दी जाये. इस पर    जस्टिस माहेश्वरी ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस दलील का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते समय अपने आधार कार्ड का आगे का हिस्सा और अपनी पत्नी के आधार कार्ड का पिछला हिस्सा दर्शाया था.  

 

इस आधार कार्ड के जरिए उन्होंने तेलंगाना में अपना घर दिखाने की कोशिश की थी.  सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि हाईकोर्ट से मिली राहत कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर हासिल की गयी 

 

 

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