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SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज को आपराधिक मामलों के रोस्टर से हटाने का आदेश वापस लिया

New Delhi :  सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर आयी है. SC  ने अपना स्टैंड बदलते हुए आज शुक्रवार को चार दिन पुराना   आदेश वापस ले लिया. उस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार के खिलाफ सख्त टिप्पणी की थी.

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एक दीवानी मामले में आपराधिक कार्यवाही की अनुमति देने के लिए जस्टिस प्रशांत कुमार आलोचना की थी.  इस मामले में  SC  ने आज साफ किया कि चार अगस्त को जारी किये गये आदेश का उद्देश्य जस्टिस प्रशांत कुमार को शर्मिंदा करना या उन पर आक्षेप लगाना नहीं था. बता दें कि जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह आदेश सुनाया था.

 


सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के कई जजों ने पत्र लिखकर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से SC के  आदेश को नहीं मानने का आग्रह किया था. जजों के आग्रह पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने CJI को पत्र लिखा था.    CJI के निर्देश पर आज शुक्रवार को जस्टिस जे बी पारदीवाला की अगुवाई वाली बैंच ने दोबारा उस मामले की सुनवाई की, बैंच का कहना था कि उनकी पिछली टिप्पणी न्यायपालिका की गरिमा बनाये रखने के लिए थी.   


 
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि सीजेआई बीआर गवई द्वारा पुनर्विचार करने के अनुरोध के बाद इन टिप्पणियों को हटाया जा रहा है. कहा कि   हम पुराने आदेश में  पैरा 25 और 26 हटा रहे हैं. हम स्वीकार करते हैं कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ही मास्टर रोस्टर हैं. कहा कि  हमारा निर्देश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रशासनिक शक्तियों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है  

 


मामला यह है कि जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की बैंच ने 4 अगस्त को एक आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्हें सेवानिवृत्त होने तक आपराधिक मामलों के रोस्टर से हटाने का आदेश दिया था. क्योंकि उन्होंने एक दीवानी विवाद में आपराधिक प्रकृति के समन को बरकरार रखा था.

 

 

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जजों को नागवार गुजरा. उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वह एक पूर्ण अदालत बुलायें, जिससे सुप्रीम कोर्ट केउस आदेश पर चर्चा की जाये.  जिसमें जस्टिस कुमार को आपराधिक रोस्टर से हटाने को कहा था.

 

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