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Dhanbad News: अनाथालय में बच्चों के बीच फैली खुजली, इलाज के बजाय रिश्तेदार के पास भेज रहा वार्डन

Dhanbad News: अनाथ आश्रम में बीमार बच्चों की देखभाल और उन्हें रिश्तेदार के पास भेजने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि किसी बच्चे की तबीयत खराब होती है तो उसकी चिकित्सा और सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
 
अनाथ आश्रम में फैली खुजली की बीमारी
  • 50 में 40 से अधिक बच्चे खुजली से पीड़ित
  • बीमार बच्चे को रिश्तेदार के घर भेजा, वहां लटका था ताला
  • बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदारी पर उठे सवाल

Dhanbad News:  धनबाद के पूर्वी टुंडी प्रखंड के पोखरिया स्थित पेमिया ऋषिकेश अनाथ विद्यालय में खुजली फैलने से बच्चे मुश्किलों में पड़े हैं.  विद्यालय में रहने वाले करीब 50 बच्चों में से 40 से अधिक के खुजली से पीड़ित  हैं. आरोप है कि जिन बच्चों की हालत ज्यादा बिगड़ रही है, उन्हें वार्डन रिश्तेदारों के घर भेज रहे हैं. जिन बच्चों के रिश्तेदार घर पर नहीं मिल रहे हैं वह बच्चे परेशान हो रहे हैं और भटकने को मजबूर हैं.

 

अनाथालय में बच्चों के इलाज, देखभाल और सुरक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. खास बात यह है कि विद्यालय का नाम टुंडी के विधायक मथुरा महतो के माता-पिता के नाम पर रखा गया है. ऐसे में बच्चों की बीमारी और उनकी देखभाल को लेकर सामने आई शिकायतें चर्चा का विषय बन गई हैं.

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पूर्वी टुंडी के पोखरिया स्थित इस विद्यालय में करीब 50 बच्चे रहते हैं. इनमें से 40 से अधिक बच्चों के खुजली से पीड़ित होने की बात कही जा रही है. बच्चों में एक साथ इस तरह की समस्या सामने आने से उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

 

विद्यालय के वार्डन उपेंद्र शर्मा के मुताबिक बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों को बुलाया गया था और उन्हें दवाइयां भी दी गई हैं.  इसके बावजूद कई बच्चे खुजली की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में बच्चों का समुचित इलाज और बीमारी पर नियंत्रण सुनिश्चित करना जरूरी है.

 

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू एक नौ वर्षीय बच्चे से जुड़ा है. आरोप है कि खुजली से उसकी हालत बिगड़ने के बाद उसे दूसरे बच्चे के साथ रिश्तेदार के घर भेज दिया गया. लेकिन वहां पहुंचने पर घर में ताला लगा मिला. रिश्तेदारों के मौजूद नहीं होने के कारण बच्चा इधर-उधर भटकता रहा.

 

बच्चे के रिश्तेदार बबलू मरांडी के मुताबिक वह अपना इलाज कराने रांची गए हुए थे. रात करीब 10 बजे लौटने पर उन्हें जानकारी मिली कि उनका बच्चा घर के बाहर भटक रहा है. इसके बाद उन्होंने वार्डन से संपर्क किया और बच्चे की तलाश शुरू की.

 

इस घटना ने विद्यालय में बीमार बच्चों की देखभाल और उन्हें रिश्तेदारों के पास भेजने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि किसी बच्चे की तबीयत खराब होती है तो उसकी चिकित्सा और सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. ऐसे में बच्चे को रिश्तेदार के घर भेजने से पहले वहां किसी जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी सुनिश्चित की गई थी या नहीं यह जांच का विषय है.

 

साथ ही बड़ी संख्या में बच्चों के खुजली से पीड़ित होने के मामले में बीमारी के कारणों की पहचान, सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच और उचित उपचार की जरूरत है. अब देखना होगा कि विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाते हैं.

 

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