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नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में अब कबाड़ घोटाला

Palamu News: कबाड़ की बिक्री से जुड़ी फाइल और चेक-ड्राफ्टर अब तक कुलपति के कार्यालय में ही है. बैक ड्राफ्ट या चेक की वैधता तीन महीने तक ही निर्धारित है. कबाड़ की बिक्री हुए चार महीना से अधिक हो गया. इससे कबाड़ खरीदने वाले की ओर से दिये गये चेक या ड्राफ्ट की वैधता भी समाप्त होने के कगार पर होगा.
 
फाइल फोटो

 

Palamu News: कुलपति दिनेश कुमार सिंह के कार्यकाल में नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं. इसमें नियम विरूद्ध सामग्रियों की खरीद सहित अन्य मामले शामिल हैं. अब विश्वविद्यालय द्वारा बेचे गये कबाड़ (रद्दी) में घोटाले का आरोप लगा है. साथ ही सरकार के स्तर पर इससे संबंधित शिकायत की गयी है.


कबाड़ घोटाले से संबंधित शिकायती पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा टेंडर प्रकाशित कर कबाड़ की बिक्री की गयी. इसमें पुराने कंप्यूटर, समाप्त हो चुकी परीक्षाओं की कॉपियों के अन्य चीजें शामिल है. 

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बताया जाता है कि विश्वविद्यालय द्वारा बेचे गये कबाड़ को पांच बड़े ट्रकों पर लाद कर ले जाया गया. कबाड़ की ढलाई में ट्रक नंबर UP67T-5644, BR02M-6063, BR02GAA-9511,BR02GAA-2827   और BR02AA-5898 शामिल था. इन ट्रकों से ढोये गये कबाड़ की अनुमानित कीमत करब 40 लाख रुपये आंकी गयी है. लेकिन कबाड़ खरीदने के बदले विश्वविद्यालय में सिर्फ 3.30 लाख रुपये का चेक या ड्राफ्ट जमा किया गया है.

 

कबाड़ की बिक्री से जुड़ी फाइल और चेक-ड्राफ्टर अब तक कुलपति के कार्यालय में ही है. बैक ड्राफ्ट या चेक की वैधता तीन महीने तक ही निर्धारित है. कबाड़ की बिक्री हुए चार महीना से अधिक हो गया. इससे कबाड़ खरीदने वाले की ओर से दिये गये चेक या ड्राफ्ट की वैधता भी समाप्त होने के कगार पर होगा. 

 

डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव इस कबाड़ बिक्री के लिए बनी समिति के सदस्य थे. गौरव श्रीवास्तव के पास एक्जामिनेशन कोऑर्डिनेटर का प्रभार भी था. गौरव ने इस पद से इस्तीफा दे दिया है.

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