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बाबूलाल अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख पेसा पर झूठ फैला रहे हैं : सतीश

Ranchi : पेसा नियमावली को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बयान पर गठबंधन सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. 

 

सतीश पौल मुंजनी ने मरांडी के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यह आदिवासी समाज को गुमराह करने और भय का माहौल बनाने की राजनीतिक कोशिश है.

 

सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि पेसा नियमावली संविधान, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, उच्च न्यायालय की टिप्पणियों और व्यापक जन-परामर्श के बाद तैयार की गई है.

 

इसमें सभी सांसदों और विधायकों के साथ विमर्श किया गया है. उनका कहना है कि यह नियमावली आदिवासी स्वशासन को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे संवैधानिक आधार प्रदान करती है.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि संथाल समाज सहित 35 आदिवासी जातियों की धार्मिक आस्था और परंपराओं पर हमले का आरोप लगाना भ्रामक और निराधार है. पेसा नियमावली में पहली बार ग्राम सभा को स्पष्ट कानूनी अधिकार, संरचना और प्रक्रिया दी गई है, ताकि कानून केवल कागजों तक सीमित न रहे.

 

सतीश पौल मुंजनी ने स्पष्ट किया कि संविधान और पेसा अधिनियम में आदिवासी समाज की सामाजिक, धार्मिक और परंपरागत व्यवस्थाओं को पूर्ण मान्यता दी गई है. नियमावली में इन्हें कमजोर करने का कोई प्रावधान नहीं है. प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही तय करने का उद्देश्य ग्राम सभा के निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करना है.

 

जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत कर रही है. सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग में ग्राम सभा को निर्णायक अधिकार दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अराजकता को ही स्वशासन के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है.

 

उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के 25 वर्षों के इतिहास में भाजपा और बाबूलाल मरांडी के लंबे शासनकाल के दौरान पेसा कानून को लागू करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई. अब जब गठबंधन सरकार इसे धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है, तो राजनीतिक जमीन खिसकने के डर से भ्रम फैलाया जा रहा है.

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