Search

झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में सेमिनार, दक्षिण एशिया के बदलते समीकरणों पर मंथन

Ranchi: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग में दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आज शुभारंभ हुआ. सेमिनार का पहला दिन आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. 19–20 मार्च तक चलने वाले इस सेमिनार का आयोजन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), आईएमपीआरआई तथा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विज्ञान संघ के सहयोग से किया जा रहा है.

 

‘दक्षिण एशिया में सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन: शासन परिवर्तन, भू-राजनीतिक गतिशीलता का पुनर्संयोजन एवं शक्ति-संतुलन का पुनर्निर्धारण’ विषय पर केंद्रित इस सेमिनार में देश-विदेश के विद्वानों ने समकालीन वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर गंभीर चर्चा की.

 

उद्घाटन सत्र की शुरुआत आयोजन सचिव डॉ. बिभूति भूषण बिस्वास के प्रारंभिक वक्तव्य से हुई, जिसमें उन्होंने विषय की वर्तमान वैश्विक संदर्भ में प्रासंगिकता को रेखांकित किया. इसके बाद सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अकादमिक संवाद के महत्व पर प्रकाश डाला.

 

मुख्य अतिथि के रूप में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रो. सेशादरी रामानुजन चारी ने दक्षिण एशिया की बदलती राजनीतिक संरचना और वैश्विक शक्तियों के प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया. वहीं आईएमपीआरआई की संपादकीय अध्यक्ष डॉ. सिमी मेहता ने सेमिनार की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे. सत्र का समापन डॉ. अपर्णा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

 

दूसरे सत्र की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. अरविंद कुमार ने की. इस दौरान प्रो. चिंतामणि महापात्रा, ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अमर नारायण और अंतरराष्ट्रीय अतिथि प्रो. होसे मैनुएल मोरालेस वाल्देस ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक शक्ति संतुलन पर अपने विचार साझा किए.

 

दिन के अंतिम सत्र की अध्यक्षता सेंट जेवियर कॉलेज के डॉ. बिरेंद्र कुमार सिन्हा ने की. इस सत्र में प्रो. प्रणव कुमार, डॉ. देबाशीश नंदी, डॉ. असीस मिस्त्री और डॉ. अविप्सु हलदर ने दक्षिण एशिया की सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक चुनौतियों पर अपने शोध प्रस्तुत किए.

 

इसके अतिरिक्त विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सारंग माधेकर ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सेमिनार वैश्विक समझ और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने दूसरे दिन के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//