Ranchi : आज से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो गया है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू परंपरा में सृष्टि का प्रथम दिवस माना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी. यही वजह है कि इस तिथि को नवसंवत्सर के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है. इस बार हिंदू नववर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्र भी शुरू हो रहा है, जिससे घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई है.
वही विभिन्न चौक चौराहों में भगवा ध्वज स्थापना भी किए गए. पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि हिंदू पंचांग में 60 संवत्सरों का चक्र होता है. इस वर्ष शुरू हो रहा विक्रम संवत् 2083 ‘रौद्र संवत्सर’ है, जिसे 54वां संवत्सर माना जाता है. उनके अनुसार इस संवत्सर में गुरु राजा और मंगल मंत्री रहेंगे, जिससे धर्म, ऊर्जा, साहस और त्वरित निर्णय की प्रवृत्ति बढ़ेगी.
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अधिक मास के कारण 12 के बजाय 13 मास का योग बन रहा है. ज्येष्ठ मास दो बार आएगा, जिससे धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह वर्ष बदलाव, सक्रियता और आध्यात्मिक चेतना का संकेतक माना जा रहा है.
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