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भरण-पोषण के एक ही बकाये पर बार-बार जेल भेजना गलत: हाईकोर्ट

Ranchi News: अदालत ने दुमका फैमिली कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करते हुए पति दशरथ सिंह को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दशरथ सिंह की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर यह आदेश दिया. याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट द्वारा भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं करने के कारण लगातार जेल में रखे जाने को चुनौती दी थी.
 
फाइल फोटो
  •  झारखंड हाईकोर्ट ने पति को तत्काल रिहा करने का दिया आदेश
  • पति को 23 बार 30-30 दिनों के लिए भेजा गया था जेल, 
  • हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश किया रद्द

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं करने पर पति को लगातार 30-30 दिनों के लिए जेल में रखने के मामले में फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125(3) के तहत भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं करने पर एक बकाये के लिए अधिकतम एक महीने की कैद दी जा सकती है. एक ही बकाये के लिए बार-बार जेल की सजा देना कानूनी रूप से उचित नहीं है.

 

अदालत ने दुमका फैमिली कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करते हुए पति दशरथ सिंह को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दशरथ सिंह की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर यह आदेश दिया. याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट द्वारा भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं करने के कारण लगातार जेल में रखे जाने को चुनौती दी थी.

 

पत्नी और बेटी के लिए निर्धारित था आठ हजार रुपये मासिक भरण-पोषण

मामले के अनुसार, दशरथ सिंह की पत्नी ने अपने और अपनी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दुमका फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी. पत्नी ने अपने लिए आठ हजार रुपये और बेटी के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की थी.
प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, दुमका ने 31 मार्च 2023 को आदेश पारित कर पति को पत्नी के लिए पांच हजार रुपये और बेटी के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया था. यह राशि 31 अगस्त 2021 से देय थी.


भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं होने पर पत्नी ने 15 मई 2023 को आदेश के अनुपालन के लिए निष्पादन याचिका दायर की. इसके बाद पति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया और उसे 30-30 दिनों के लिए जेल भेजने के आदेश दिए जाने लगे.

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एक ही बकाये के लिए दोबारा जेल भेजने का आरोप

पति की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि फैमिली कोर्ट ने 23 बार 30-30 दिनों की अवधि के लिए हिरासत बढ़ाने के आदेश पारित किए. इस दौरान उसे एक दिन के लिए भी रिहा नहीं किया गया. याचिकाकर्ता के अनुसार, कई आदेशों में उस महीने या अवधि का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं था, जिसके भरण-पोषण के बकाये के लिए उसे जेल भेजा जा रहा था. उसकी ओर से बताया गया कि सितंबर 2021 के बकाये के लिए उसे कई बार जेल भेजा गया था.

 
याचिकाकर्ता ने अपनी रिहाई के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था, लेकिन 16 अप्रैल 2026 को उसे खारिज कर दिया गया. इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.


वहीं पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया कि उसे अब तक भरण-पोषण की कोई राशि नहीं मिली है. इसलिए फैमिली कोर्ट ने उचित आदेश पारित किया है. पत्नी के अधिवक्ता ने पति को भरण-पोषण की राशि का भुगतान करने का निर्देश देने का आग्रह किया.


फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द, तत्काल रिहाई का निर्देश

हाईकोर्ट ने पाया कि दुमका फैमिली कोर्ट ने 23 आदेशों के माध्यम से पति की हिरासत लगातार 30-30 दिनों के लिए बढ़ाई थी. अदालत ने इसे धारा 125(3) के वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना.


इसके बाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करते हुए दशरथ सिंह को तत्काल जेल से रिहा करने का निर्देश दिया. अदालत को याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि रिहाई के बाद वह भरण-पोषण की कुछ राशि का भुगतान करने का प्रयास करेगा.
इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामले को निष्पादित कर दिया.

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