Ranchi News: हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिला के मौजा केंटोनमेंट की बेशकीमती जमीन पर बनी चहारदीवारी तोड़ने पर रोक लगा दी. खास महाल की इस जमीन को वापस लेने का फैसला सरकार के स्तर पर विचाराधीन है. लीजधारी के वंशज इस जमीन को बेचना चाहते हैं. फिलहाल जमीन पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव परिवार का अवैध कब्जा है.
जानकारी के मुताबिक हजारीबाग जिला के मौजा केंटोनमेंट की 50 डिसमिल खास महाल जमीन मोहम्मद एहसान को दी गयी थी. लीज की अवधि 31 मार्च 2008 को समाप्त हो चुकी है. लीजधारी की मौत हो चुकी है. उनकी बेटी नाजिश कौशर ने इस बेशकीमती जमीन को 15 लाख रुपये में बेचने का एग्रिमेंट दीपूगढ़ा निवासी मनीष कुमार के साथ किया था. एग्रिमेंट के समय पांच लाख रुपये अग्रिम भी लिया था. बाद में नाजिश ने एग्रिमेंट रद्द कर दिया और दलजीत सिंह को पावर ऑफ एटर्नी दे दिया.
दलजीत सिंह जमीन का म्यूटेश नाजिश कौशर के नाम पर कराने के लिए आवेदन दिया. इसमें तत्कालीन खास महाल पदाधिकारी की ओर से कई स्तर से रिपोर्ट मांगी गयी. साथ ही लीजधारी की स्थिति और उनके वंशजों की जानकारी मांगी गयी. इस बीच पूर्व मंत्री योगेंद्र साव परिवार ने खास महाल की इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश शुरू की.
सूचना मिलने पर तत्कालीन अनुमंडल अधिकारी विद्याभूषण कुमार ने पूर्व मंत्री द्वारा बनवायी जा रही चहारदीवारी तोड़ दी. उपायुक्त के आदेश पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और तत्कालीन विधायक अंबा प्रसाद के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने फैसला किया गया. लेकिन पुलिस ने राजनीतिक कारणों से अज्ञात लोगों के खिलाफ जमीन कब्जा करने का आरोप में प्राथमिकी दर्ज की.
खास महाल की इस बेशकीमती जमीन की जांच पड़ताल के बाद इसका लीज रिन्यू करने के बदले इसे वापस लेने का फैसला किया गया. जिला प्रशासन ने आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर इसे वापस लेने का फैसला किया. प्रमंडलीय आयुक्त ने भी सरकार द्वारा जमीन वापस लेने के प्रस्ताव पर सहमति दी. प्रमंडलीय आयुक्त की सहमति के बाद इसे भू-राजस्व विभाग के पास अंतिम निर्णय के लिए भेज दिया गया. इस पर विभागीय सचिव ने अपनी समहित दे दी है. हालांकि मामला मंत्री के स्तर पर विचाराधीन है.
जिला प्रशासन द्वारा खास महाल की इस बेशकीमती जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया के दौरान पूर्व मंत्री इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करते रहे और चहारदीवारी का निर्माण करा लिया. जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने कब्जों को रोकने और चहारदीवारी तोड़ने की कोशिश की. लेकिन कब्जा हटाने गये प्रशासनिक अधिकारी गालियां सुनकर वापस लौट गये. कब्जा हटाने गये अधिकारियों से पूर्व मंत्री यह कहते रहे कि इस जमीन में उनका करोड़ों रूपये लगा है.
इस बीच नाजिश हुसैन के पति ने मुजीबुर्रहमान ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की. इसमें यह कहा गया कि सरकार द्वारा जमीन वापस लेने की सूचना उन्हें दी गयी है. जिले के अधिकारी जमीन पर बनी चहारदीवारी सहित अन्य संरचनाओं को तोड़ रहे हैं. इसलिए इस प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगायी जाए. न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ में इस याचिका की सुनवाई हुई. उन्होंने 5-10-2026 इस जमीन पर तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी.
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