Seraikela : सरायकेला पुलिस व सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में गिफ्तार 22 लाख रुपये के इनामी तीन हार्डकोर नक्सलियों के तार एक करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश से जुड़े होने के संकेत मिले हैं. यह खुलासा गिरफ्तार नक्सली मदन महतो उर्फ शंकर, बरिन सिंह उर्फ सागर और मीना पहाड़िया उर्फ मौरा से पुलिस की पूछताछ में हुआ है. यह जानकारी सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी ने ने गुरुवार को प्रेसवार्ता में दी.
गिरफ्तार नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम मदन महतो उर्फ शंकर का है. उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था. एसपी ने बताया कि मदन महतो पिछले करीब 25 वर्षों से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था. उसके खिलाफ झारखंड व पश्चिम बंगाल में 41 से अधिक मामले दर्ज हैं. कई बड़े नक्सली हमलों और 62 सुरक्षाकर्मियों की शहादत से जुड़े मामलों में भी उसकी भूमिका रही है.
दूसरा गिरफ्तार नक्सली बरिन सिंह उर्फ सागर है, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम था. संगठन के भीतर उसे रणनीतिक भूमिका निभाने वाला सदस्य माना जाता था. वह हमलों की योजना तैयार करने, दस्तों का संचालन करने और नए कैडरों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी संभालता था.
गिरफ्तार तीसरा नक्सली मीना पहाड़िया उर्फ मौरा है, जिस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था. मीना संगठन की विस्फोटक विशेषज्ञ थी और IED, लैंडमाइंस तैयार करने, विस्फोटक लगाने व रसद आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल रहती थी. अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कब्जे से AK-47 राइफल, इंसास राइफल, एक पिस्टल, कॉर्डेक्स वायर और करीब 250 राउंड जिंदा कारतूस बरामद किए हैं.
एक करोड़ के इनामी नक्सली तक पहुंचने की तैयारी
एसपी मनोज स्वर्गियारी ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार नक्सलियों के तार एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश से जुड़े होने के संकेत मिले हैं. अब सुरक्षा एजेंसियों का फोकस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर है.
एसपी ने बताया कि हाल के दिनों में माओवादी संगठन आर्थिक संकट से जूझ रहा था और लेवी वसूली बढ़ाने की कोशिश कर रहा था. इसी बीच मिली सटीक खुफिया सूचना के आधार पर आईजी ऑपरेशन के स्तर पर रणनीति तैयार की गई. इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने जंगल क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर तीनों नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया.
उन्होंने बताया कि मजबूत खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों के बेहतर समन्वय के कारण वर्षों से फरार इनामी नक्सलियों तक पहुंचना संभव हुआ. पूछताछ से मिले इनपुट के आधार पर आने वाले दिनों में नक्सल नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा.
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