- बरामदगी सूची में नहीं था अभियुक्त का हस्ताक्षर
- आर्म्स एक्ट के तहत आवश्यक स्वीकृति आदेश को ट्रायल कोर्ट में नहीं किया गया प्रदर्शित
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एनडीपीएस व आर्म्स एक्ट मामले में दोषी युवक सूरज बनरा उर्फ करिया को जमानत दे दी है. अभियोजन पक्ष और पुलिस की गंभीर लापरवाही इसका कारण बना है.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने एक क्रिमिनल अपील में यह आदेश दिया है. कोर्ट ने पाया कि बरामदगी सूची में आरोपी के हस्ताक्षर नहीं लिए गए हैं और नकद राशि की जब्ती में भी हस्ताक्षर नहीं हैं.
आर्म्स एक्ट का स्वीकृति आदेश ट्रायल कोर्ट में भी Exhibit नहीं किया गया. इस आधार पर कोर्ट ने दोषी की जमानत मंजूर की.
अपीलकर्ता का पक्ष
अपीलकर्ता की ओर से सजा निलंबन और जमानत के लिए हस्तक्षेप याचिका (I.A. ) दाखिल किया गया था. बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि बरामदगी सूची में अपीलकर्ता के हस्ताक्षर नहीं हैं.
आर्म्स एक्ट के तहत आवश्यक स्वीकृति आदेश (Sanction Order) को ट्रायल में प्रदर्शित नहीं किया गया. अपीलकर्ता लगभग 18 महीने से अधिक समय से हिरासत में है.
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से APP ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के घर से देसी पिस्तौल, 331/353 ग्राम गांजा और 1.70 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं. गवाहों और जांच अधिकारी ने भी अभियोजन के पक्ष का समर्थन किया है.
क्या है मामला
अपीलकर्ता सूरज बनरा को सत्र न्यायालय, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) ने एनडीपीएस केस संख्या 06/2023 में दोषी करार दिया था. ट्रायल कोर्ट ने उसे
एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(A) के तहत 1 वर्ष की सजा, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)(a) के तहत 4 वर्ष की सजा और दोनों मामलों में 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया था. कोर्ट ने सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया था.
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