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शशांका एग्रोटेक को मिला पहला पुरस्कार, मत्स्य विभाग दूसरे स्थान पर

रांची : नामकुम स्थित राल एवं गोंद संस्थान में दो दिनी किसान मेला सह कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का शुक्रवार को समापन हुआ. इसमें शशांका एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड को मिला पहला पुरस्कार. मत्स्य विभाग को दूसरा पुरस्कार मिला. तीसरा पुरस्कार सखी मंडल की दीदियों को मिला. समापन समारोह के मौके पर शशांका एग्रोटेक के एग्रीकल्चर हेड संजीव कुमार ने बताया कि पॉलीहाउस के तहत सब्जियों और फलों की खेती करने के लिए हमें इस बार पहले स्थान पर पुरस्कार मिला है. पिछले वर्ष भी हमें पहला स्थान प्राप्त हुआ था. दूसरा पुरस्कार हासिल करने वाले मत्स्य पालन के अधिकारी रेवती हांसदा ने बताया कि ग्रामीण स्तर में छोटी-बड़ी मछलियों से अच्छे रोजगार के साधन किए जा सकते हैं. मछलियों में काफी मात्रा में प्रोटीन और ओमेगा पाया जाता है और यह कुपोषण को दूर करता है. इसे भी पढ़ें : कोडरमा:">https://lagatar.in/koderma-posan-sakhis-performed-under-the-banner-of-citu-kept-their-demand/26584/">कोडरमा:

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सीएम हेमंत सोरेन ने किया था मेले का उद्घाटन

वहीं तीसरे स्थान पर रही सखी मंडल की दीदियों ने बताया कि तसर और लाह की खेती से दिन प्रतिदिन महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र में अपने आप को जीविकोपार्जन चलाने में सक्षम हो रही है. सखी मंडल की दीदी रोशनी ने बताया कि इस बार हमें तृतीय स्थान पर पुरस्कार मिला है. 25000 महिलाएं सखी मंडल के तहत काम कर रही हैं. लगभग ₹50000 की सलाना होती है इनकी कमाई. वक्ताओं ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं. किसानों के हित में सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है. सरकार ने इस वर्ष लक्ष्य की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा धान की खरीदारी की है. झारखंड में कृषि और कृषि उत्पादों के संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए नए गोदाम और फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाने पर सरकार विशेष जोर दे रही है. पूरे राज्य में लगभग 500 नए गोदाम और 224 फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाए जा रहे हैं.

वन उपज के लिए भी झारखंड की पहचान

किसान मेले के समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में जहां खनिज संपदा प्रचुर मात्रा में है. वहीं वन उपज के लिए भी यह राज्य अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं, लेकिन इसका सही उपयोग संरक्षण उत्पादन और बाजार उपलब्ध नहीं होने के साथ किसानों को सही मूल्य नहीं मिलना इसके विकास में बाधा पैदा कर रही है. सरकार की कोशिश है कि इन समस्याओं को दूर करने के साथ वन उपज से ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ा जा सके. झारखंड सरकार लाह की खेती को कृषि का दर्जा देगी और इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय करेगी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को रांची के नामकुम स्थित भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान में आयोजित दो दिवसीय किसान मेला सह कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में यह घोषणा की थी. इसे भी पढ़ें : लॉकडाउन">https://lagatar.in/lockdown-shows-how-important-migration-is-hemant-soren/26621/">लॉकडाउन

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