Chhindwara/ Ranchi: बीते साल सितंबर महीने में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में कफ सिरफ से कई बच्चों की मौत से देशभर में हंगामा मच गया था. इस मामले में विसरा रिपोर्ट से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बच्चों की मौत जहरीले केमिकल ‘डाई एथिलीन ग्लाइकॉल’ के कारण ही हुई थी. जांच में यह केमिकल कोल्ड्रिफ कफ सिरप में निर्धारित मात्रा से अधिक मिला.
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और बैतूल जिले में बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसी सामान्य शिकायत थी. परिजन ने बच्चों के इलाज के लिए परासिया स्थित एक सरकारी डॉक्टर के प्राइवेट क्लीनिक में गए थे. जहां बच्चों को कोल्ड्रिफ कफ सिरप लेने की सलाह दी गई. परिजनों का कहना है कि दवा लेने के कुछ दिनों बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी. कई बच्चों की किडनी ने काम करना बंद कर दिया और एक के बाद एक मौतें होती चली गईं.
परासिया के पुलिस अधिकारी ने बताया मृत बच्चों के विसरा रिपोर्ट में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की पुष्टि हुई है. यह केमिकल किडनी पर सीधा असर करता है और अंग निष्क्रिय हो जाते है. जांच में कोल्ड्रिफ कफ सिरप में भी यही जहरीला केमिकल अधिक मात्रा में मिला है. रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बच्चों की मौत जहरीले कफ सिरप के सेवन से ही हुई.
बता दें, कई बच्चों की मौत के बाद पुलिस ने जांच के दौरान कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन, सिरप खरीदने की सलाह देने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी, स्टॉकिस्ट, केमिकल एनालिस्ट समेत कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया है. सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. एसआईटी मुताबिक, विसरा रिपोर्ट आने के बाद अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट दोबारा कोर्ट में दाखिल की जाएगी. इसमें नए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ और सख्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं.
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