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हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: पारा शिक्षकों की संविदा सेवा भी अब पेंशन के लिए गिनी जाएगी

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जिन पारा शिक्षकों ने बाद में नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की, उनकी पूर्व की संविदा (Para Teacher) सेवा को भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जोड़ा जाएगा. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने मानिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी और अब्दुल हमीद अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है.
 
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Ranch: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जिन पारा शिक्षकों ने बाद में नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की, उनकी पूर्व की संविदा (Para Teacher) सेवा को भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जोड़ा जाएगा. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने मानिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी और अब्दुल हमीद अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है. 


कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं की पूर्व संविदा सेवा को पेंशन योग्य सेवा मानकर सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने का आदेश दिया. कोर्ट का निर्देश है कि सभी याचिकाकर्ताओं के पारा शिक्षक के रूप में की गई सेवा को पेंशन के लिए जोड़ा जाए. 


पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्गणना कर भुगतान किया जाए. यह भुगतान आदेश की प्रति प्राप्त होने से 8 सप्ताह के भीतर किया जाए. सेवानिवृत्ति की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाए. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और शिवानी भारद्वाज ने पक्ष रखा.  


दरअसल याचिकाकर्ताओं ने 8 से 12 वर्ष तक पारा शिक्षक के रूप में लगातार सेवा देने के बाद नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी. नियमित सेवा में लगभग 9-10 वर्ष कार्य करने के बाद वे सेवानिवृत्त हुए, लेकिन सरकार ने उनकी संविदा सेवा को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा था.


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की संविदा सेवा उसी विभाग में बिना किसी वास्तविक व्यवधान के नियमित सेवा में परिवर्तित हुई थी और नियमित नियुक्ति के लिए उनकी पूर्व सेवा आवश्यक पात्रता भी थी. इसलिए उनकी संविदा सेवा को पेंशन संबंधी लाभों से बाहर नहीं रखा जा सकता.

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