Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

सिमडेगा SP हाईकोर्ट में हुए हाजिर, कोर्ट ने अवमानना याचिका किया समाप्त

Ranchi: हाईकोर्ट ने उषा शर्मा की अवमानना याचिका की सुनवाई में सिमडेगा एसपी का पक्ष जानने के बाद अवमानना याचिका को समाप्त कर दिया. इससे पहले कोर्ट के आदेश के आलोक में सिमडेगा एसपी सशरीर उपस्थित हुए. उन्होंने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता का क्लेम नहीं बनता है. दरअसल  कोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर सिमडेगा एसपी को तलब किया था.


कोर्ट ने कहा था कि 2 मई 2024 को पारित आदेश का अब तक अनुपालन नहीं किया गया है. कोर्ट ने यह कहा था कि सिमडेगा एसपी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताएं कि उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए? सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने पक्ष रखा. 

 

क्या है मामला 

 

 बता दें कि उषा शर्मा की याचिका पर कोर्ट ने 2 मई 2024 को सिमडेगा पुलिस बल में कार्यरत रहे एक दिवंगत कांस्टेबल की पत्नी को पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित मामले में आदेश दिया था. 


याचिकाकर्ता के पति सिमडेगा पुलिस बल में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे और उन्होंने लगभग 11 वर्षों तक सेवा दी थी. दो वर्षों की अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण उन्हें निलंबित किया गया था. इस दौरान 24 जनवरी 2023 को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया.


याचिकाकर्ता उषा शर्मा ने पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति, मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ (Death-cum-Retiral Benefits) तथा पारिवारिक पेंशन के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन दिया था, लेकिन अब तक न तो पेंशन निर्धारित की गई और न ही कोई सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किया गया था.


वहीं मामले में राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई थी कि उषा शर्मा को पति की नियुक्ति कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई थी, इसलिए याचिकाकर्ता को कोई लाभ नहीं दिया जा सकता.

 

क्या था हाईकोर्ट का आदेश 

 

 हाईकोर्ट ने उषा शर्मा के रिट पर अपने 2 मई 2024 के आदेश में कहा था कि 11 वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा को पेंशन और अन्य लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह उचित पहचान पत्रों के साथ सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करें. 


कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया था कि प्रतिनिधित्व प्राप्त होने के बाद आठ सप्ताह के भीतर मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ, पारिवारिक पेंशन व अन्य लाभों के संबंध में विधि के अनुसार निर्णय लें. साथ ही यदि याचिकाकर्ता अनुकंपा नियुक्ति की पात्र पाई जाती हैं, तो उस पर भी नियमानुसार विचार किया जाए.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही