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पलामू जिले में अबुआ आवास योजना की रफ्तार सुस्त

दो वर्षों में 45 हजार आवास स्वीकृत, हजारों अब भी अधूरे 


Medininagar : झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना पलामू जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है. वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवार आज भी अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं. दो वर्षों में 45 हजार से अधिक आवास स्वीकृत किए गए थे. लेकिन किस्त भुगतान और निर्माण की सुस्त रफ्तार योजना में बड़ी बाधा बन रही है.


अबुआ आवास योजना का उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को समय पर पक्का मकान उपलब्ध कराना है.लेकिन दो वर्षों की संयुक्त प्रगति यह संकेत देती है कि भुगतान व्यवस्था, तकनीकी स्वीकृति और फील्ड मॉनिटरिंग में बेहतर समन्वय की आवश्यकता है.

2023-24 में स्वीकृत आधे  आवास अधूरे

वर्ष 2023-24 में जिले को 13,681 आवासों का लक्ष्य दिया गया था जिनमें से 13,457 आवास स्वीकृत हुए थे. लेकिन दिसम्बर 2025 तक केवल 7212 आवास (54 प्रतिशत) ही पूर्ण हो सके.पहली किस्त का भुगतान 12,757 लाभुकों को किया गया. 2174 आवास दूसरी किस्त (प्लिंथ स्तर) के गैप में अटके हुए हैं.

2024-25 में जियोटैगिंग आगे, लेकिन निर्माण पीछे

वित्तीय वर्ष 2024-25 की मॉक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 31919 आवास स्वीकृत किए गए हैं. इनमें से 22356 लाभुकों को भुगतान हो चुका है और 17772 आवासों की जियोटैगिंग पूरी की जा चुकी है, जो लगभग 83 प्रतिशत है. दूसरी किस्त तक स्थिति संतोषजनक मानी जा रही है. लेकिन तीसरी किस्त में 5,970 आवास लंबित हैं.चौथी किस्त में कई प्रखंडों में भुगतान बेहद कम या शून्य दर्ज किया गया है.

प्रखंडवार प्रगति में भारी असमानता

जिले के पांकी, हुसैनाबाद, पाटन, छतरपुर और मेदिनीनगर जैसे बड़े प्रखंडों में स्वीकृत आवासों की संख्या अधिक है, लेकिन पूर्णता दर 50–55 प्रतिशत के बीच ही बनी हुई है. मेदिनीनगर  में वर्ष  2023-24 के दौरान केवल 42 प्रतिशत आवास ही पूरे हो सके. पिपरा, पंडवा और बिश्रामपुर जैसे प्रखंडों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, फिर भी सैकड़ों मकान अधूरे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पहली किस्त मिलने के बावजूद कई लाभुक प्लिंथ लेवल तक निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सके. ऐसे मामलों में प्रखंड कार्यालयों की ओर से लाभुकों को बार-बार नोटिस जारी किए जा रहे हैं जिससे असंतोष की स्थिति बन रही है.

किस्त भुगतान सबसे बड़ी बाधा

दोनों वर्षों की रिपोर्ट का साझा निष्कर्ष है कि दूसरी, तीसरी और चौथी किस्त के भुगतान में देरी योजना की सबसे बड़ी बाधा है.निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत और मजदूरी के कारण लाभुक पहली किस्त की राशि से आगे निर्माण नहीं बढ़ा पा रहे हैं. जबकि प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर दबाव बनाया जा रहा है. दूसरी ओर दूसरी किस्त का समय पर भुगतान नहीं होने से कई आवास आधार स्तर पर ही लटक गए हैं.तीसरी और चौथी किस्त में देरी के कारण निर्माण कार्य रुक-रुक कर चल रहा है. जिससे लाभुकों की परेशानी और बढ़ गई है.

 

लाभुकों को राशि का भुगतान जल्द :डीडीसी

इस संबंध में डीडीसी जावेद हुसैन ने कहा कि हाल ही में पलामू जिले को 28 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी. इसमें से करीब 2700 लाभुकों के खातों में तीसरी किस्त की राशि भेज दी गई है. उन्होंने कहा कि शेष राशि से जल्द ही लाभुकों को दूसरी किस्त का भुगतान भी कर दिया जाएगा, ताकि आवास निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके.


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