Ranchi News: झारखंड से होकर गुजरने वाली दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) जोन की ट्रेनों पर अब 'समय' का भरोसा नहीं रहा. आरटीआई (RTI) से मिले रेलवे बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच इस जोन की यात्री ट्रेनों का समय-पालन (Punctuality) लुढ़ककर महज 54.18% पर आ गया है.
इसका सीधा मतलब है कि जोन की 100 में से 46 ट्रेनें अपने तय समय से काफी पीछे चल रही हैं. रेलवे की लेटलतीफी का यह खुलासा झारखंड के ही एक युवक की आरटीआई (RTI) से हुआ है. सरायकेला खरसावां निवासी कुमार अभिषेक ने यह जानकारी मांगी थी. जिसके जवाब में रेलवे बोर्ड के कोचिंग निदेशालय की ओर से रिपोर्ट जारी किया गया.
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देशभर में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन
अगर पूरे देश के 18 रेलवे जोनों से तुलना करें, तो दक्षिण पूर्व रेलवे का प्रदर्शन नीचे से दूसरे नंबर पर है. अप्रैल से अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में सबसे खराब स्थिति ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECOR) की है, जिसका समय-पालन मात्र 43.40% है. इसके ठीक बाद 54.18% के साथ दक्षिण पूर्व रेलवे दूसरे पायदान पर खड़ा है. वहीं 94.80% समय-पालन के साथ उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.
लगातार गिर रहा पंक्चुअलिटी का ग्राफ
आरटीआई रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण पूर्व रेलवे का समय-पालन पिछले कुछ वर्षों से लगातार खराब हो रहा है. साल 2020-21 में इस जोन का समय-पालन 95.55% था, जो 2022–23 में 86.35% और 2023-24 में गिरकर 72.08% पर आ गया. वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 61.97% रहा. 2025-26 आते-आते ट्रेनों का समय-पालन और घटकर 56.26% तक पहुंच गया. वहीं 2026 –27 में और नीचे खिसक कर 54.18% पर आ गया है.
रांची और चक्रधरपुर मंडल के यात्रियों पर असर
दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत कुल चार रेल मंडल आते हैं. इनमें झारखंड के रांची और चक्रधरपुर मंडल भी शामिल हैं. पूरे जोन का समय-पालन खराब होने के कारण स्वाभाविक तौर पर इन दोनों मंडलों से खुलने और गुजरने वाली ट्रेनें भी लेटलतीफी का शिकार हो रही हैं. इसका खामियाजा रांची समेत पूरे राज्य के यात्रियों को स्टेशन पर लंबे इंतजार के रूप में भुगतना पड़ रहा है.
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