Ranchi : सेंट पॉल्स कॉलेज में बीसीए (BCA) कोर्स को लेकर छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है. आज छात्रों ने आइसा (AISA) छात्र संगठन के नेतृत्व में कॉलेज परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए.
छात्रों का कहना है कि उन्होंने बीसीए कोर्स के नाम पर नामांकन लिया और उसी के अनुसार फीस भी जमा की, लेकिन उन्हें बीएससी कंप्यूटर एप्लीकेशन (BSc CA) का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है और डिग्री भी उसी नाम से दिए जाने की बात सामने आ रही है. इस मुद्दे को लेकर कई बार कॉलेज प्रशासन से बातचीत की गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.

प्रदर्शन के दौरान आइसा के जॉइंट सेक्रेटरी रितेश मिश्रा और वाइस प्रेसिडेंट स्नेहा कुमारी ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन फीस में किसी तरह की कटौती करने को तैयार नहीं है. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर प्रिंसिपल और प्रशासन द्वारा उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से धमकाया गया और कहा गया कि आगे के सेमेस्टर में उन्हें परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
छात्रों की मांग है कि अगर बीसीए कोर्स का एफिलिएशन नहीं है, तो फीस में कमी की जाए या फिर सही कोर्स के अनुसार पढ़ाई सुनिश्चित की जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आरटीआई दाखिल करेंगे और हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे.
वहीं, कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनुज कुमार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कॉलेज को रांची विश्वविद्यालय से बीसीए कोर्स के लिए विधिवत एफिलिएशन प्राप्त है और उसी के अनुसार पढ़ाई कराई जा रही है.
उन्होंने बताया कि सेमेस्टर 1 और 2 के सर्टिफिकेट में ‘बीएससी इन कंप्यूटर साइंस’ लिखा होना विश्वविद्यालय की त्रुटि है, जिसके लिए कॉलेज जिम्मेदार नहीं है. इस संबंध में छात्रों को लिखित जानकारी भी दे दी गई है ताकि वे विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी समस्या रख सकें.
फीस के मुद्दे पर प्रिंसिपल का कहना है कि सालाना 24,000 रुपये की फीस कंप्यूटर लैब और अन्य सुविधाओं को देखते हुए काफी कम है. उन्होंने यह भी कहा कि छात्र अब तीसरे सेमेस्टर में आकर इस मुद्दे को उठा रहे हैं, जो सवाल खड़े करता है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और आइसा कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें धमकाया गया.
फिलहाल, छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है. अब निगाहें रांची विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वे इस विवाद में क्या हस्तक्षेप करते हैं और छात्रों को किस तरह राहत मिलती है.
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