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संत पॉल कॉलेज का कारनामा: एडमिशन BCA में और परीक्षा B.Sc-CA की, RU की गलती कह झाड़ा पल्ला

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले संत पॉल कॉलेज, रांची में छात्रों के साथ गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है. सत्र 2023-26 के छात्रों का नामांकन बीसीए (BCA) कोर्स के नाम पर लिया गया, उनसे उसी आधार पर फीस भी वसूली गई और पढ़ाई भी उसी के अनुरूप कराई गई, लेकिन परीक्षा के समय उनका एडमिट कार्ड बीएससी-सीए (B.Sc-CA) के रूप में जारी कर दिया गया.
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Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले संत पॉल कॉलेज, रांची में छात्रों के साथ गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है. सत्र 2023-26 के छात्रों का नामांकन बीसीए (BCA) कोर्स के नाम पर लिया गया, उनसे उसी आधार पर फीस भी वसूली गई और पढ़ाई भी उसी के अनुरूप कराई गई, लेकिन परीक्षा के समय उनका एडमिट कार्ड बीएससी-सीए (B.Sc-CA) के रूप में जारी कर दिया गया.

 

इस अचानक बदलाव से छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं. उनका कहना है कि उन्हें कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ-साथ अब साइंस के विषयों की भी परीक्षा देनी पड़ रही है, जबकि इन विषयों की पढ़ाई उन्हें पहले कराई ही नहीं गई. छात्रों का आरोप है कि इस बदलाव की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई और विरोध करने पर कॉलेज प्रशासन इसे विश्वविद्यालय की गलती बताकर पल्ला झाड़ लेता है.

 

छात्रों ने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया जाता है कि बाद में इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा और अंततः बीसीए की ही डिग्री दी जाएगी. लेकिन वास्तविकता यह है कि परीक्षा दूसरे कोर्स की ली जा रही है, जिससे अधिकांश छात्र फेल हो रहे हैं.

 

मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि बीसीए और बीएससी-सीए दोनों कोर्स की फीस और पाठ्यक्रम अलग-अलग हैं. बीसीए की फीस जहां अधिक है, वहीं बीएससी-सीए की फीस लगभग आधी होती है. इसके बावजूद छात्रों से अधिक फीस वसूली जा रही है, जबकि उन्हें दूसरे कोर्स की परीक्षा में बैठाया जा रहा है.

 

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज द्वारा बिल्डिंग फीस, परीक्षा फीस और खेल शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है. साथ ही रांची विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार के बीसीए कोर्स को अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कॉलेज में नामांकन लिया जा रहा है.

 

 

इस मुद्दे को लेकर आइसा (AISA) की टीम जब कॉलेज के प्राचार्य से मिलने पहुंची, तो उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया. छात्रों के सड़क जाम की चेतावनी देने के बाद प्राचार्य कॉलेज से चुपचाप निकल गए, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया.

 

आइसा ने इस पूरे मामले को छात्रों के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है. संगठन ने मांग की है कि यदि विश्वविद्यालय ने इस कोर्स की अनुमति नहीं दी है, तो ऐसे कॉलेजों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, छात्रों से वसूली गई फीस वापस की जाए और उन्हें उसी कोर्स में पढ़ाई सुनिश्चित की जाए, जिसके नाम पर उनका नामांकन हुआ है. मौके पर आइसा झारखंड के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, जिला अध्यक्ष विजय कुमार, जिला सचिव संजना मेहता, पिंटू कुमार, मोहित सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.

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