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स्टेट बार काउंसिल चुनाव: मुख्य चुनाव अधिकारी ने वकील महेश तिवारी से मांगा स्पष्टीकरण

  • मुख्य चुनाव अधिकारी ने पूछा आपका रिजल्ट रोक दिया गया है क्या कहना है? 
  • हाईकोर्ट ने आज महेश तिवारी का लाइसेंस सस्पेंड के आदेश पर लगाई है रोक 
  • स्टेट बार काउंसिल की ओर से लाइसेंस 2 साल के लिए सस्पेंड किए जाने को दी है चुनौती

Ranchi: मुख्य चुनाव अधिकारी जस्टिस अंबुज नाथ ने आज वकील महेश तिवारी से स्पष्टीकरण मांगा है. उनसे पूछा है कि आपका स्टेट बार काउंसिल चुनाव में रिजल्ट रोक दिया गया है. आपको रांची सिविल कोर्ट से 2 साल की सजा सुनाई गई है, इस पर आपको क्या कहना है. 


यहां बता दे की वकील महेश तिवारी ने झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में 677 का आंकड़ा प्राप्त कर लिया है. लेकिन उनका रिजल्ट आज जारी नहीं कर उसे होल्ड पर रखा गया है. हाइकोर्ट के अधिवक्ता महेश तिवारी को रांची सिविल कोर्ट से 2 साल की सजा सुनाए जाने पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल की ओर से उनका लाइसेंस सस्पेंड करने को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में आज हुई थी. 

 


मामले में कोर्ट ने महेश तिवारी को हाइकोर्ट से बड़ी राहत दी है. लाइसेंस सस्पेंड के आदेश पर रोक लगाई है. हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश की प्रति अब तक मुख्य चुनाव अधिकारी जस्टिस अंबुज नाथ को नहीं मिली है.


दरअसल, महेश तिवारी ने उनका वकालत लाइसेंस दो वर्षों के लिए निलंबित किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है. आज सुनवाई के दौरान महेश तिवारी की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि उनका लाइसेंस निलंबित करने का अधिकार फिलहाल स्टेट स्टेट बार काउंसिल के निवर्तमान अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण के पास नहीं है. क्योंकि अभी स्टेट बार काउंसिल चुनाव की मतगणना चल रही है और राजेंद्र कृष्ण भी इसमें एक उम्मीदवार है.

 

यहां उल्लेखनीय है कि रांची की निचली अदालत से उन्हें दो वर्ष की सजा मिलने के बाद की गई थी. बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि एडवोकेट एक्ट की धारा 24ए के प्रावधानों के तहत, नैतिक पतन से जुड़े मामलों में सजा होने पर संबंधित अधिवक्ता का लाइसेंस निलंबित किया जाता है. 


काउंसिल ने अपने आदेश में महिपाल सिंह राणा बनाम उत्तर प्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि धारा 24ए के प्रावधान वकीलों पर भी लागू होते हैं. आदेश के अनुसार, सजा की तिथि से अगले दो वर्षों तक महेश तिवारी किसी भी अदालत में अधिवक्ता के रूप में पेश नहीं हो सकेंगे.

 

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