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मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0’ अभियान को लेकर सरकार सख्त, विभागों से मांगी गई लंबित मामलों की सूची

झारखंड में लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए चलाए जा रहे “मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान को लेकर राज्य सरकार ने सभी विभागों को जरूरी निर्देश जारी किए हैं.
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Ranchi :  झारखंड में लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए चलाए जा रहे “मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान को लेकर राज्य सरकार ने सभी विभागों को जरूरी निर्देश जारी किए हैं. इस संबंध में प्रधान सचिव सह विधि परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव ने राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक,  उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है.

 

 

अभियान को सफल बनाने के लिए विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश

जारी पत्र में बताया गया है कि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के. मेडिएशन एंड कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी (MCPC) द्वारा राष्ट्रव्यापी स्तर पर चलाए जा रहे “मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान को सफल बनाने के लिए विभागों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है.

 

विभागीय स्तर पर पत्र जारी कर सभी विभागों से एक नोडल पदाधिकारी नामित करने और ऐसे लंबित मामलों की पहचान करने को कहा गया है, जिन्हें मध्यस्थता (मेडिएशन) के माध्यम से सुलझाया जा सकता है.

 

मुख्य सचिव ने बैठक कर अभियान की प्रगति की समीक्षा की

झारखंड के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त करें और विभाग में लंबित ऐसे मामलों की समीक्षा कर सूची तैयार करें जिन्हें मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है.

 

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि विभागों में लंबित ऐसे मामलों की पहचान कर उनका त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. साथ ही इन मामलों की सूची सीधे मेंबर सेक्रेटरी, झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा), डोरंडा, रांची को ई-मेल के माध्यम से भेजी जाए.

 

राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि मध्यस्थता की प्रक्रिया के माध्यम से विवादों का जल्द समाधान हो सके और न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके.

 

 

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