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‘आरक्षण पर राजनीति नहीं, नीयत दिखाइए’, दीपिका पांडेय सिंह का केंद्र सरकार पर हमला

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति करने के बजाय स्पष्ट नीयत दिखानी चाहिए.
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Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति करने के बजाय स्पष्ट नीयत दिखानी चाहिए.

 

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहती है, जिससे उसकी मंशा पर संदेह उत्पन्न होता है. उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विपक्ष के सहयोग से सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी और उम्मीद थी कि जनगणना के बाद ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी समुचित प्रतिनिधित्व मिलेगा. लेकिन तीन वर्षों तक इसे लागू नहीं करना और अब बिना जनगणना के परिसीमन की दिशा में कदम बढ़ाना संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है.

 

उन्होंने कहा कि देश की जनता अब सरकार की नीतियों को समझ चुकी है. महिलाओं, किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर किए गए वादे अब तक अधूरे हैं. उन्नाव, हाथरस, कठुआ और मणिपुर जैसे घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के सवाल पर सरकार की संवेदनशीलता नजर नहीं आती.

 

प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पर लगाए गए आरोप भ्रामक हैं. उन्होंने कहा कि जब महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ, तब विपक्ष ने पूरा समर्थन दिया था, लेकिन इसके बावजूद लागू करने में देरी और 16 अप्रैल 2026 को देर रात अधिसूचना जारी करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है.

 

दीपिका पांडेय सिंह ने मांग की कि लोकसभा, राज्यसभा और सभी विधानसभाओं में तत्काल प्रभाव से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को वास्तविक भागीदारी मिल सके. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस निर्णय जरूरी.

 

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