National News: गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दरवाजा खटखटाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को गलत तरीके से हिरासत में रखने को लेकर डीएम मेधा रूपम के सैलरी से पांच लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया था.
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इसी आदेश के खिलाफ मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. दरअसल, आकृति चौधरी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसे बाद में गैर-कानूनी पाया गया था. हाईकोर्ट ने नोएडा डीएम की ओर से हिरासत का आदेश जारी करने के तरीके की कड़ी आलोचना की थी, बेंच चेतावनी दी थी कि मनमाने ढंग से काम करने वाले अफसरों का तानाशाही भरा रवैया उत्तर प्रदेश को एक ऑर्वेलियन डिस्टोपिया में बदल सकता है.
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने माना कि एनएसए के तहत चौधरी को लगातार जेल में रखना अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि हिरासत का आदेश और उसके आधार में कोई ठोस सबूत थे और उन्हें बिना सोचे-समझे जारी किया गया था.
अदालत ने कहा था कि अधिकारियों को कानून के तहत व्यापक शक्तियां दी गई हैं क्योंकि उन्हें नागरिकों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों, सम्मान, गरिमा और कल्याण की रक्षा करते हुए सुशासन सुनिश्चित करना होता है. साथ ही उन्हें राज्य की स्थिरता और देश की एकता व अखंडता को भी बनाए रखना होता है.
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