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DSPMU में फीस वृद्धि पर नाराज छात्र संगठनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

DSPMU में बीते 6 महीनों से चल रहा फीस वृद्धि विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. आदिवासी छात्र संघ, छात्र राजद और आइसा (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा के बाजारीकरण और छात्रों के आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है.
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Ranchi : DSPMU में बीते 6 महीनों से चल रहा फीस वृद्धि विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. आदिवासी छात्र संघ, छात्र राजद और आइसा (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा के बाजारीकरण और छात्रों के आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है.

 

छात्र नेता वसीम अंसारी ने बताया कि पूर्व में सात दिनों तक विश्वविद्यालय बंद रहने के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि स्थायी कुलपति के आने पर इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा. हालांकि, नए कुलपति ने यह कहते हुए फीस वृद्धि वापस लेने से इनकार कर दिया कि यह फैसला वर्ष 2022 में लागू हो चुका है.

 

छात्रों के अनुसार, बीकॉम (सत्र 2021-24) की सालाना फीस ₹6890 से बढ़ाकर लगभग ₹14,000 कर दी गई है, जबकि एमकॉम की फीस ₹5000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है. आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने इसे 100 प्रतिशत से अधिक वृद्धि बताते हुए कड़ा विरोध जताया.

 

छात्रों का आरोप है कि भारी फीस वसूली के बावजूद विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. वाईफाई, स्मार्ट बोर्ड और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, जबकि गर्मी के मौसम में छात्र पंखों के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

 

कॉमर्स विभाग के छात्रों ने दावा किया कि हजारों छात्रों से करोड़ों रुपये का राजस्व जुटाया जा रहा है, लेकिन खर्च का स्पष्ट हिसाब नहीं दिया जा रहा. छात्रों ने प्रशासन पर फिजूलखर्ची और वित्तीय पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

 

आंदोलन के दौरान आदिवासी छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष बादल गुप्ता को हार्ट अटैक आने की घटना ने विवाद को और बढ़ा दिया है. छात्रों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उनका हालचाल लेने नहीं पहुंचा. इलाज से जुड़े बिल को भी प्रशासन द्वारा फर्जी बताए जाने पर छात्रों में भारी आक्रोश है.

 

छात्र संगठनों ने छात्राओं के लिए बस सेवा और GSCASH लागू करने की मांग भी उठाई है. साथ ही चेतावनी दी है कि जल्द ही कॉमर्स विभाग और प्रशासनिक भवन में ताला बंदी की जाएगी, हालांकि अन्य विभागों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी. छात्रों ने साफ कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगामी 10 से 15 दिनों में आंदोलन राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उग्र रूप ले सकता है.

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