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DSPMU की टेली काउंसलिंग में विद्यार्थियों ने पूछे करियर से जुड़े सवाल

Ranchi News: काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी के संस्थानों, राज्य लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की तैयारी, विदेशी भाषाओं के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं और 12वीं के बाद उपलब्ध शैक्षणिक विकल्पों के बारे में जानकारी मांगी.
 
फोन पर विद्यार्थियों को गाइड करते कुलपति

Ranchi News: डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची की ओर से बुधवार को आयोजित पहली टेली करियर काउंसलिंग सफलतापूर्वक संपन्न हुई. दोपहर दो से तीन बजे तक चले इस कार्यक्रम में साहेबगंज, दुमका, जमशेदपुर, हजारीबाग, खूंटी, गुमला, बुंडू, चतरा और रांची समेत विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने फोन के माध्यम से करियर संबंधी परामर्श प्राप्त किया. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए.

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काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी के संस्थानों, राज्य लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की तैयारी, विदेशी भाषाओं के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं और 12वीं के बाद उपलब्ध शैक्षणिक विकल्पों के बारे में जानकारी मांगी. कुलपति ने विद्यार्थियों को उनके सवालों के अनुरूप विस्तार से मार्गदर्शन दिया. इस दौरान दुमका और साहेबगंज समेत कई स्थानों से अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सवाल पूछे.

 

कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने कहा कि टेली करियर काउंसलिंग विश्वविद्यालय की ओर से सामुदायिक विकास और जनसंपर्क की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इसके माध्यम से दूरदराज के विद्यार्थी भी घर बैठे शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क एवं सामुदायिक प्रसार विभाग के निदेशक डॉ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में यह कार्यक्रम पूरे वर्ष संचालित किया जाएगा.

 

काउंसलिंग में साहेबगंज की रूबी कुमारी, जमशेदपुर के आशीष सिंह, हजारीबाग के प्रियांश, दुमका की पल्लवी सिंह, बुंडू के कालीचरण और रांची की मनीषा समेत कई विद्यार्थियों ने सवाल पूछे. विश्वविद्यालय के अनुसार, DSPMU प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने इस तरह की टेली करियर काउंसलिंग शुरू की है. कार्यक्रम को सफल बनाने में पत्रकारिता एवं जनसंचार तथा स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

 

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