Lagatar Desk/Patna News : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि बच्चों में नशीले पदार्थों का सेवन केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है.
वे शनिवार को बिहार लोक भवन में आयोजित 'चाइल्डहुड बियॉन्ड ड्रग्स: प्रोटेक्शन, केयर एंड रीइंटीग्रेशन' विषय पर पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह लेक्चर को संबोधित कर रहे थे. CJI सूर्यकांत ने बच्चों में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन और इससे जुड़ी चुनौतियों पर अपनी बात रखी.
साथ ही नशे की गिरफ्त में आने वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील और मानवीय रवैया अपनाने की जरूरत पर जोर दिया. (झारखंड की लेटेस्ट और बड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.....)
STORY | Substance abuse in children not just public health concern, a child protection issue as well: CJI
— Press Trust of India (@PTI_News) September 26, 2026
Chief Justice of India Surya Kant on Saturday said substance abuse among children must be understood as a child protection issue, rather than as a matter of public health… pic.twitter.com/VCNBqysgRh
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हर पांच में एक किशोर पर नशे का खतरा
अपने संबोधन में CJI ने द लैंसेट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि भारत में हर पांच में से कम से कम एक किशोर के नशीले पदार्थों के सेवन से मध्यम से लेकर गंभीर जोखिम में होने की बात सामने आई है.
उन्होंने कहा कि इस समस्या को केवल इलाज या स्वास्थ्य के नजरिए से देखने के बजाय बच्चों की सुरक्षा के व्यापक मुद्दे के रूप में समझने की जरूरत है. CJI ने कहा कि बच्चों में नशीले पदार्थों के सेवन को न सिर्फ पब्लिक हेल्थ की चिंता के तौर पर, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे के तौर पर भी समझा जाना चाहिए.
बच्चों के प्रति संवेदनशील रवैये की जरूरत
जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे बच्चों के साथ संवेदनशीलता से पेश आना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के साथ-साथ उनकी गरिमा और आत्मसम्मान की भी रक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को सिर्फ नशे की समस्या से बाहर निकालना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ना भी जरूरी है.
शिक्षा, रिश्ते और भरोसा लौटाना जरूरी
CJI सूर्य कांत ने 'बहाली' यानी रिस्टोरेशन के महत्व को समझाते हुए कहा कि इसका मकसद ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चा फिर से अपने बचपन की जरूरी चीजों को हासिल कर सके. उन्होंने कहा कि बच्चे को शिक्षा, परिवार और रिश्तों का साथ, खेल, भरोसा और बेहतर भविष्य की उम्मीद मिलनी चाहिए.
उनके मुताबिक, बच्चों को उनकी मौजूदा परेशानियों से आगे बढ़कर अपने भविष्य को लेकर आत्मविश्वास महसूस करने का अवसर देना जरूरी है. CJI ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानूनी या चिकित्सकीय कदम पर्याप्त नहीं होंगे. इसके लिए परिवार, समाज और संस्थाओं को मिलकर बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और उनके पुनर्वास पर काम करना होगा.

