Ranchi: गर्मी की शुरुआत के साथ ही झारखंड में पेयजल संकट गहराने लगा है. पेयजल संकट को लेकर झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भी विधायकों ने चिंता व्यक्त की थी. साथ ही पंचायत स्तर पर 10 चापाकल लगाने की मांग भी की थी. लेकिन दूसरी ओर राज्य में जहां नल-जल योजना के अधूरे कार्यों के कारण लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं.
वहीं राज्य में मौजूदा चापाकलों की खराब स्थिति ने समस्या को और बढ़ा दिया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में कुल 2,79,618 चापाकल हैं. इनमें से करीब 1,99,842 चापाकल चालू हैं, जबकि 79,669 चापाकल खराब पड़े हुए हैं. यानी लगभग हर चौथा चापाकल काम नहीं कर रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल की स्थिति गंभीर बनी हुई है.

जामताड़ा, गढ़वा, बोकारो और देवघर में सबसे अधिक खराब
जिला-वार आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जिलों में खराब चापाकलों का प्रतिशत काफी अधिक है. जामताड़ा (लगभग 63%), गढ़वा (55%), बोकारो (48%) और देवघर (40%) जैसे जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. वहीं गिरिडीह, देवघर और सिंहभूम क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में चापाकल खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कुछ जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां खराब चापाकलों का प्रतिशत कम है. इनमें लातेहार (लगभग 7%), गोड्डा (16%), साहिबगंज (17%) और चतरा (18%) शामिल हैं.
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