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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की NIA की याचिका, झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

Ranchi. सुप्रीम कोर्ट ने NIA मामले के सजायाफ्ता प्रफुल्ल मालाकार को जमानत दिए जाने के झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट द्वारा दी गई बेल के खिलाफ एनआईए की SLP क्रिमिनल याचिका को खारिज कर दी. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई.
 

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने NIA मामले के सजायाफ्ता प्रफुल्ल मालाकार को जमानत दिए जाने के झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट द्वारा दी गई बेल के खिलाफ एनआईए की SLP क्रिमिनल याचिका को खारिज कर दी. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई. NIA ने सजायाफ्ता प्रफुल्ल मालाकार को झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 16 सितंबर 2025 को दी गई जमानत का विरोध करते हुए उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

 

प्रतिवादी (प्रफुल्ल मालाकार) की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने वर्चुअल रूप से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रतिवादी को निचली अदालत (रांची की NIA की विशेष अदालत) से 20 दिसंबर 2024 को अधिकतम 15 साल की सजा मिली थी. वह मामले में 4 साल 7 माह कस्टडी में रह चुका है. इसलिए उसे झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिया जाना उचित है.  कोर्ट ने प्रतिवादी का पक्ष जानने के बाद NIA की एसएलपी क्रिमिनल खारिज कर दी.

 

क्या है मामला 


दरअसल प्रफुल्ल मालाकार को पुलिस ने 24 अगस्त 2012 को दानापुर से गिरफ्तार किया था. लेकिन उसे चार दिन तक अदालत में पेश नहीं किया था. प्रफुल्ल की भाभी ने नजदीक की कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष इस बात को प्रस्तुत किया कि उनके देवर को पुलिस ले गई और उसे अदालत में प्रस्तुत नहीं किया है. 


कोर्ट ने लोकल दानापुर पुलिस को नोटिस जारी किया था. इसके बाद चार दिनों के बाद प्रफुल्ल मालाकार को 29 अगस्त 2012 को अदालत में प्रस्तुत किया गया था और बताया गया था कि प्रफुल्ल मालाकार को सिलोदर जंगल से M16 अमेरिका राइफल जो वियतनाम युद्ध में इस्तेमाल हुआ है, उसके साथ पकड़ा है. इस केस का ट्रायल एनआईए की रांची की विशेष अदालत में चला, इसके बाद अदालत ने उसे सजा सुनाई थी. सजा के खिलाफ अपील में झारखंड हाईकोर्ट ने उसे 16 सितंबर 2025 को जमानत प्रदान की थी. जिसे NIA ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

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