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सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवादी मोहम्मद आरिफ के curative Petition पर केंद्र को नोटिस जारी किया

 New Delhi :  सुप्रीम कोर्ट ने लश्कर-ए- तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ के Curative Petition पर केंद्र और NIA को नोटिस जारी किया है. इस आतंकवादी को वर्ष 2000 में लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले में मौत की सजा सुनायी जा चुकी है.

 

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आतंकवादी की ओर से दायर Review Petition खारिज करते हुए मौत की सजा बरकरार रखी है. उसने अंतिम न्यायिक प्रक्रिया के तहत Curative Petition दायर किया है.

 

आतंकवादी मोहम्मद आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसके Review Petition पर सुनवाई के बाद नवंबर 2022 में दिये गये फैसले के खिलाफ Curative Petition दायर की है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश जेके माहेश्वरी ने आतंकवादी की याचिका पर नोटिस जारी किया है


Curative Petition में इस आंतकवादी ने कई नये मुद्दे उठाये हैं. उनसे याचिका में कहा है कि उसके खिलाफ सजा के मामले में सुनवाई के दौरान इंडियन एविडेंस एक्ट में निहित प्रावधानों के खिलाफ कॉल डिटेल को सबूत के तौर पर स्वीकार किया गया.


 इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत कॉल डिटेल को बिना सक्षम प्रमाण पत्र के स्वीकार नहीं किया जा सकता है. साथ ही यह भी कहा है कि उसकी औपचारिक गिरफ्तारी और वास्तविक गिरफ्तारी के बीच उसके द्वारा स्वीकार की गयी बातों को न्यायालय में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था. इस आंतकवादी ने इसके अलावा कुछ अन्य तकनीकी मुद्दे उठाये है.


उल्लेखनीय है कि लाल किले पर आंतकवादी हमले में इसे 25 दिसंबर 2000 को गिरफ़्तार किया गया था. ट्रायल के बाद न्यायालय ने 24 अक्तूबर 2005 को दोषी करार दिया. 31 अक्तूबर को मौज की सजा सुनायी. मुजरिम ने इस सजा के ख़िलाफ हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.


सभी न्यायालयों ने इसे दी गयी मौत की सजा को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट ने आंतकवादी आरिफ़ के Review Petition पर सुनवाई के बाद उसे दी गयी मौत की सजा को बरकरार रखा था. न्यायालय ने लाल किेले पर किये गये हमले को देश की एकता और अखंडता पर किया गया हमला करार देते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा था.  बता दें  कि मोहम्मद आरिफ की दया याचिका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  खारिज कर चुकी  है.

 

 

 

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