New Delhi : एससी-एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाया जाये या नहीं हटाया जाये, इस संबंध में देश में काफी दिनों से चर्चा जारी है. गाहे बगाहे यह विषय सुर्खियां बनता रहा हैं. आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिर चर्चा में ला दिया है.
खबर है कि इससे संबंधित दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों सहित केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में मांग की है कि क्रीमी लेयर को एससी-एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए,
इसके लिए सुप्रीम कोर्ट निर्देश जारी करें. SC ने सरकारों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता का दावा है कि आरक्षण का फायदा ज्यादातर अनुसूचित जाति और जनजाति के अमीर और मजबूत लोग उठा रहे हैं, जबकि गरीबों को लाभ नहीं मिल पा रहा है.
याद करे कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त 2024 को अपने ही 20 साल पुराने फैसले को पलटते हुए, कहा था कि राज्य सरकारें अनुसूचित जाति के कोटे के अंदर सब-कैटेगरी बना सकती हैं. कहा था कि अनुसूचित जाति को उनकी जातियों के आधार पर बांटना संविधान के आर्टिकल 341 का उल्लंघन नहीं है.
उस समय सात जजों की बेंच में शामिल जस्टिस बीआर गवई ने सलाह दी थी कि राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ग्रुप के अंदर क्रीमी लेयर की पहचान करने और उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित करने के लिए एक पॉलिसी बनानी चाहिए.
इस क्रम में 9 अगस्त 2024 को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि वह अनुसूचित जाति और जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट लागू नहीं करेगी. सरकार ने कैबिनेट मीटिंग की थी.
उसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि एनडीए सरकार बीआर अंबेडकर के बनाये संविधान से बंधी है. संविधान में एससी/एसटी कोटे में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है
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