Ranchi : देश में बच्चों के लापता होने के मामले एक गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्ष 2022 में 18 वर्ष से कम उम्र के 1,27,874 बच्चे लापता हुए हैं. यानी देश में औसतन हर दिन लगभग 350 बच्चे गुम हो रहे हैं.
हालांकि इस अवधि के दौरान 80561 बच्चों की सकुशल बरामदगी भी हुई है. झारखंड की बात की जाए तो 18 साल से कम उम्र के बच्चे लापता होने के मामले में झारखंड देश में 20 वें में स्थान पर है.
सर्वाधिक लापता बच्चों वाले 10 राज्य
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या कुछ राज्यों में विकट रूप ले चुकी है. बच्चों के लापता होने के सर्वाधिक मामले में पहले स्थान पर पश्चिम बंगाल है, यहां 19,540 बच्चे लापता हुए हैं. इसके बाद मध्यप्रदेश (15,087) दूसरे और बिहार (12,600) तीसरे स्थान पर है. दिल्ली (1,880 बच्चे) चौथे, तमिलनाडु (8,876 बच्चे) पांचवें, ओडिशा (7565 बच्चे) छठे, राजस्थान (7412 बच्चे) सातवें और उत्तरप्रदेश (5924 बच्चे) आठवें, महाराष्ट्र (5393 बच्चे) नौवें और छत्तीसगढ़ (5210 बच्चे) दसवें स्थान पर हैं.
80,561 बच्चे बरामदग, 47,000 अब भी लापता
इन भयावह आंकड़ों के बीच कुछ राहत की बात यह है कि इस अवधि में 80,561 बच्चों की सकुशल बरामदगी की गई है. हालांकि चिंता का विषय यह है कि अब भी 47,313 बच्चे लापता हैं, जो उनके परिवारों के लिए गहरी चिंता और पीड़ा का कारण बनी हुई है.
- कुल लापता बच्चे : 1,27,874
- कुल बरामद बच्चे : 80,561
- अब भी लापता बच्चे : 47,313
मानव तस्करी के खतरे के बावजूद झारखंड 20वें स्थान
झारखंड, जो मानव तस्करी से जुड़े मामलों के कारण अक्सर चर्चा में रहता है, लापता बच्चों की संख्या के मामले में देश में 20वें स्थान पर है. राज्य से कुल 748 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 335 बच्चों को बरामद किया जा चुका है.
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड के ग्रामीण इलाकों की लड़कियां अक्सर मानव तस्करी, घरेलू कामगार या झूठे रोजगार के वादों के जाल में फंस जाती हैं. इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार और पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं.
लयौन शोषण व तस्करी का शिकार होती हैं लड़कियां
लापता होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से काफी अधिक है. आंकड़ों की प्रवृत्ति यह दर्शाती हैं कि लड़कियों को अक्सर तस्करी, यौन शोषण, बाल विवाह और अनैतिक गतिविधियों में धकेला जाता है. अपराधी बच्चों को बहला-फुसलाकर या अपहरण कर इन अपराधों को अंजाम देते हैं.
राज्यवार लापता बच्चों का विस्तृत आंकड़ा
- पश्चिम बंगाल : 19540
- मध्यप्रदेश : 15087
- बिहार : 12600
- दिल्ली : 11880
- तमिलनाडु : 8876
- ओडिशा : 7565
- राजस्थान : 7412
- उत्तरप्रदेश : 5924
- महाराष्ट्र : 5393
- छत्तीसगढ़ : 5210
- आंध्रप्रदेश : 4813
- हरियाणा : 4214
- तेलंगाना : 4097
- पंजाब : 3607
- गुजरात : 2387
- केरला : 1918
- कर्नाटक : 1717
- असम : 1573
- उत्तराखंड : 958
- जम्मू कश्मीर : 821
- झारखंड : 748
- चंडीगढ़ : 523
- हिमाचल प्रदेश : 459
- त्रिपुरा : 154
- मणिपुर : 95
- गोवा : 55
- नागालैंड : 45
- अरुणाचल प्रदेश : 40
- अंडमान निकोबार : 44
- मेघालय : 38
- पुडुचेरी : 38
- दमन एंड दीव : 22
- सिक्किम : 19
- मिजोरम : 01
- लद्दाख : 01
- कुल : 127874
राज्यवार बरामद लापता बच्चों का विस्तृत आंकड़ा
- पश्चिम बंगाल : 12546
- मध्यप्रदेश : 11161
- तमिलनाडु : 6444
- राजस्थान : 6232
- दिल्ली : 5840
- बिहार : 5819
- आंध्रप्रदेश : 4192
- उत्तरप्रदेश : 3750
- तेलंगाना : 3588
- छत्तीसगढ़ : 3374
- महाराष्ट्र : 2801
- ओडिशा : 2728
- हिमाचल प्रदेश : 2410
- केरला : 1799
- गुजरात : 1775
- पंजाब : 1436
- कर्नाटक : 1173
- असम : 1073
- उत्तराखंड :774
- हिमाचल प्रदेश : 379
- झारखंड : 335
- चंडीगढ़ : 161
- त्रिपुरा : 124
- मणिपुर : 54
- नागालैंड : 39
- पुडुचेरी : 35
- अरुणाचल प्रदेश : 33
- अंडमान निकोबार : 33
- मेघालय : 28
- गोवा : 23
- सिक्किम : 16
- मिजोरम : 01
- दमन एंड दीव : 09
- कुल : 80561
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